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7 साल के ऑडिट के आधार पर होगा दिल्ली का नया टैरिफ तय

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता

दिल्ली वालों के लिए नई बिजली दरों का फैसला बिजली कंपनियों की 7 साल की ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर होगा। कैग के ऑडिटर बिजली कंपनियों के खातें खंगाल रहे है और 2011-17 तक खातों की रिपोर्ट तैयार कर रहे हैँ। डीईआरसी ने पहली बार जांच के लिए कैग की मदद ली है। संभावना जताई जा रही है कि मार्च के अंत तक यह जांच पूर्ण हो जाएगी।

इस जांच रिपोर्ट को दिल्ली के नए टैरिफ का आधार बनाया जा सकता है। इससे दिल्ली वालों को राहत ही मिलने की संभावना जताई जा रही है क्योंकि सरकार भी आरडब्ल्यूए की तरह इन कंपनियों के ऑडिट के आधार पर ही टैरिफ का फैसला लिए जाने की वकालत करती रही है। इसके बाद आयोग को इस संबंध में आदेश जारी किए गए थे। वर्ष 2017-18 में बिजली कंपनियों ने तकनीकी घाटों का हवाला देते हुए 30 प्रतिशत तक की टैरिफ बढ़ोत्तरी मांगी है।

सूत्रों ने बताया जा रहा है कि ऑडिट में बिजली कंपनियों के कामकाज की पूर्ण प्रक्रिया को परखा जाएगा। मसलन कंपिनयों ने कहां से कितनी बिजली ली और कहां पर कितनी ब्रिकी की। आम जनता से लिए गए बिलों से कंपनियों को कितनी आय हुई। इन सभी तथ्यों को इस जांच का आधार बनाया गया है। इसके अतिरिक्त तकनीकी सुधार कार्यो पर कितनी धनराशि खर्च की गई और कंपनियों द्वारा पेश किए वित्तीय दावों की हकीकत क्या है। इस काम के लिए दिल्ली की तीनों बिजली कंपनियों के लिए अलग- अलग टीमों की मदद ली जा रही है। कंपनियां लगातार अपने खातों में घाटा होने का दावा करती रही है और आयोग अधिक टैरिफ दिए जाने मांग कर रही है। जबकि आरडब्ल्यूए इनके ही खातों के आधार पर यह दावा करता रहा है कि कंपनियां मुनाफे में रही है और जानबूझकर उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ाया जा रहा है।

21 फरवरी तक दीजिये टैरिफ पर अपने सुझाव

नई दरों को तय करने के लिए कोई भी आम नागरिक अपने सुझाव सीधे आयोग को secyderc@nic.in पर सुझाव भेज सकता है। ये सुझाव ऑन लाइन भेजे जा सकते हैं। आम नागरिक 21 फरवरी तक ये सुझाव आयोग को भेज सकते है। इन सुझावों व जन सुनवाई के आधार पर आने वाले वित्त वर्ष में टैरिफ की नई दरों का निर्धारण किया जाएगा। टैरिफ में इस बढ़ोत्तरी को स्वीकार किया जाए या नहीं। इसके लिए डीईआरसी ने आम जनता से भी सुझाव मांग लिए हैं।

विवाद निपटारा स्कीम का पैसा भी ऑडिट के बाद ही मिलेगा

बिजली के विवादित बिलों के निपटारे के लिए बिजली कंपनियों ने बिजली बिल विवाद निपटारा स्कीम शुरू की थी। इस स्कीम में आने वाले उपभोक्ताओं से संबंधित मामलों को दो तिहाई राशि में निपटाया जाना था। यह स्कीम दिल्ली की स्लम कॉलोनियों के लिए थी। अब बिजली कंपनी ने इस स्कीम में दी गई छूट के लिए सरकार के पास वित्तीय भुगतान का दावा किया है। अब इस दावे की भी जांच सीएजी पैनल ऑडिटर को सौंपी जा रही है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही कंपनियों का भुगतान किया जाएगा।

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  • Web Title:derc planing new power tarrif on 7 years audit