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एलएसी पर सेना की तैनाती अब असामान्य: जयशंकर

विदेश मंत्री ने कहा, 2020 में चीन ने कई समझौतों का उल्लंघन किया चार साल

एलएसी पर सेना की तैनाती अब असामान्य: जयशंकर
हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीTue, 14 May 2024 09:45 PM
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विदेश मंत्री ने कहा, 2020 में चीन ने कई समझौतों का उल्लंघन किया
चार साल से गलवान में सामान्य बेस पोजीशन से आगे तैनात की जा रही सेना

कोलकाता, एजेंसी। चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बलों की तैनाती असामान्य है और देश की सुरक्षा की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। भारत ने गलवान झड़प का जवाब वहां बलों की जवाबी तैनाती से दिया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को यह बात यहां एक कार्यक्रम में कही।

विदेश मंत्री ने मंगलवार को इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा, 1962 के बाद राजीव गांधी 1988 में चीन गए, जो कई मायनों में (चीन के साथ) संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।

यह स्पष्ट समझ थी कि हम अपने सीमा मतभेदों पर चर्चा करेंगे, लेकिन हम सीमा पर शांति बनाए रखेंगे। और बाकी रिश्ता चलता रहेगा। उन्होंने कहा, तब से यह चीन के साथ संबंधों का आधार रहा है। अब जो बदला है वही 2020 में हुआ।

विदेश मंत्री ने कहा, 2020 में कई समझौतों का उल्लंघन करते हुए चीनी हमारी सीमा पर बड़ी संख्या में सेना लेकर आए और उन्होंने ऐसा उस समय किया जब हम कोविड ​​लॉकडाउन के तहत थे। भारत ने बलों की जवाबी तैनाती के जरिए जवाब दिया और अब चार साल से सेनाएं गलवान में सामान्य बेस पोजीशन से आगे तैनात की जा रही हैं।

जयशंकर ने कहा, यह एलएसी पर बहुत ही असामान्य तैनाती है। दोनों देशों के बीच तनाव को देखते हुए भारतीय नागरिक के रूप में, हममें से किसी को भी देश की सुरक्षा की अनदेखी नहीं करनी चाहिए, यह आज एक चुनौती है। उन्होंने कहा, एक आर्थिक चुनौती भी है जो पिछले वर्षों में विनिर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की उपेक्षा के कारण है। उन्होंने सवाल पूछा, भारतीय व्यवसायी चीन से इतनी अधिक खरीदारी क्यों कर रहे हैं। क्या किसी अन्य स्रोत पर इतना निर्भर रहना अच्छा है।

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