डेनमार्क में बंद हुई 400 साल पुरानी डाक सेवा
डेनमार्क ने अपनी 400 साल पुरानी पारंपरिक डाक सेवा को बंद कर दिया है। 30 दिसंबर 2025 को अंतिम खत डिलीवर किया गया। इंटरनेट और सोशल मीडिया के कारण पत्रों की मांग में 90% कमी आई है। हालांकि, पार्सल डिलीवरी सेवा जारी रहेगी। यह बदलाव अन्य यूरोपीय देशों के लिए भी उदाहरण बनेगा।

पारंपरिक डाक सेवा हमेशा के िलए बंद करने वाला दुनिया का पहला देश बना डेनमार्क व्हाट्सऐप, ईमेल और सोशल मीडिया के आने से साधारण खतों की मांग में भारी गिरावट आई है कोपेनहेगन, एजेंसी। डेनमार्क ने आधिकारिक तौर पर अपनी 400 साल पुरानी पारंपरिक डाक सेवा को बंद कर दिया है। सरकारी डाक सेवा ‘पोस्टनॉर्ड’ ने 30 दिसंबर 2025 को अपना आखिरी खत डिलीवर किया। इसके साथ ही डेनमार्क दुनिया का वह पहला देश बन गया है, जिसने यह मान लिया है कि इंटरनेट के इस दौर में अब कागज की चिट्ठियों को घर-घर पहुंचाना न तो जरूरी है और न ही आर्थिक रूप से व्यावहारिक।
दरअसल, पिछले दो दशकों में लोगों के संवाद करने का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। व्हाट्सऐप, ईमेल और सोशल मीडिया के आने से साधारण खतों की मांग में भारी गिरावट आई है। आंकड़ों की मानें तो साल 2000 के मुकाबले 2024 तक आते-आते चिट्ठियों की संख्या में 90 फीसदी से ज्यादा की कमी दर्ज की गई है। अब लोग जन्मदिन की बधाई हो या सरकारी दस्तावेज, सब कुछ ऑनलाइन भेजना ही पसंद करते हैं। इस बदलाव का सबसे भावुक हिस्सा डेनमार्क की सड़कों पर लगे वे मशहूर ‘लाल ’ हैं, जो सदियों से वहां की पहचान रहे थे। जून 2024 से अब तक लगभग 1,500 मेलबॉक्स हटा दिए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि जब इन पुराने मेलबॉक्स को चैरिटी के लिए बेचने का फैसला किया गया, तो उन्हें खरीदने के लिए लाखों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। भले ही लोग अब चिट्ठियां नहीं लिखते, लेकिन वे यादों के तौर पर इन डाक डिब्बों को अपने पास रखना चाहते हैं। एक मेलबॉक्स की कीमत लगभग 15,000 से 20,000 रुपये के बीच रही। बॉक्स - इतिहास बन गए मशहूर ‘लाल मेलबॉक्स’ ऐसा नहीं है कि खत भेजने की सुविधा पूरी तरह खत्म हो गई है। अगर किसी को अभी भी कागज का खत भेजना है, तो उन्हें इसे दुकानों के अंदर लगे खास कियोस्क (एक छोटा सा डिजिटल बूथ या स्टाल होता है) पर छोड़ना होगा। वहां से प्राइवेट कूरियर कंपनियां इन्हें मंजिल तक पहुंचाएंगी। हालांकि, सरकारी डाकिया अब घर-घर जाकर चिट्ठियां नहीं बांटेगा। भले ही चिट्ठियों का दौर खत्म हो गया हो, लेकिन ‘पोस्टनॉर्ड’ अपनी पार्सल डिलीवरी सेवा जारी रखेगी। ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते क्रेज की वजह से सामान के पार्सल पहुंचाने की मांग पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। डेनमार्क को दुनिया के सबसे डिजिटल देशों में गिना जाता है, जहां अब सरकारी कामकाज से लेकर निजी संदेशों तक सब कुछ स्क्रीन पर सिमट गया है। यह बदलाव पूरी दुनिया के लिए एक संकेत है कि भविष्य में डाकघरों का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अन्य यूरोपीय देशों के लिए भी ब्लूप्रिंट साबित होगा, जो कागज रहित व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं।

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