
भोपाल गैस त्रासदी : जहरीले कचरे की राख को दूसरी जगह ले जाने की मांग
पीथमपुर के लोगों ने भोपाल गैस त्रासदी की 41वीं बरसी पर सरकार से मांग की कि 900 टन जहरीली राख को सुरक्षित स्थान पर निपटाने के लिए ले जाया जाए। अधिकारियों के अनुसार, यह राख पीथमपुर के संयंत्र में रखी गई है, लेकिन स्थानीय लोग इसके निपटारे को लेकर चिंतित हैं।
पीथमपुर, एजेंसी। मध्यप्रदेश में भोपाल गैस त्रासदी की 41वीं बरसी पर बुधवार को पीथमपुर के लोगों ने सरकार से मांग की कि यूनियन कार्बाइड कारखाने के जहरीले कचरे के निपटान से उत्पन्न करीब 900 टन राख को निस्तारण के लिए कहीं और ले जाया जाए। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल यह राख पीथमपुर के एक संयंत्र के लीक-प्रूफ स्टोरेज शेड में सुरक्षित रखी गई है। उन्होंने बताया कि संयंत्र में यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन विषैले अपशिष्ट, 19 टन संदूषित मिट्टी और 2.2 टन पैकेजिंग सामग्री समेत कुल 358 टन की खेप को अलग-अलग चरणों में भस्म करने की प्रक्रिया इस साल जुलाई की शुरुआत में संपन्न हुई थी।

अधिकारियों के मुताबिक, राज्य सरकार ने इस राख को पीथमपुर के संयंत्र में ही निर्माणाधीन विशेष बहुपरतीय विशाल गड्ढे (लैंडफिल सेल) में डालकर इसके निपटारे की योजना बनाई थी। कचरा जलने के बाद अब इसकी राख को लेकर स्थानीय लोग आशंकाएं व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि राख का निपटारा पीथमपुर के संयंत्र के बजाय किसी निर्जन स्थान पर किया जाना चाहिए क्योंकि किसी दुर्घटना की स्थिति में लैंडफिल सेल में कोई गड़बड़ होने से मानवीय आबादी और आबो-हवा को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। बता दें कि भोपाल में दो और तीन दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था। इससे कम से कम 5,479 लोग मारे गए थे और हजारों लोग अपंग हो गए थे। इसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में गिना जाता है।

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