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 कॉलेजों में सीट खाली रहने की वजह सीयूईटी नहीं: डीयू कुलपति

कॉलेजों में सीट खाली रहने की वजह सीयूईटी नहीं: डीयू कुलपति

संक्षेप:

दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने सभी कॉलेजों को सलाह दी है कि वे सीट मैट्रिक्स पर पुनर्विचार करें ताकि कम से कम राउंड में सीटों का बेहतर आवंटन हो सके। कुलपति ने स्पष्ट किया कि किसी पाठ्यक्रम को बंद नहीं किया जाएगा, और सीयूईटी के कारण खाली सीटों की संख्या बढ़ने की आलोचना के बीच यह कदम उठाया गया है।

Dec 17, 2025 01:27 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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-कुलपति ने कम से कम राउंड में सीटों के बेहतर आवंटन के लिए कालेजों को सीट मैट्रिक्स पर फिर से विचार करने की सलाह दी - कुलपति ने कहा रिक्त सीटों के बाद भी कोई भी कोर्स बंद नहीं करेगा डीयू -एससी,एसटी ओबीसी टीचर्स फोरम के अध्यक्ष डा.हंसराज सुमन का कहना है कि पूर्व की भांति होता आरक्षित वर्ग का दाखिला तो सीटें नहीं होती खाली नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता दिल्ली विश्वविद्यालय में सीयूईटी में बाद रिक्त सीटों की संख्या बढ़ने पर आलोचना के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति ने बयान जारी कर कहा है कि डीयू के कुछ कॉलेजों में स्नातक प्रोग्रामों में खाली सीटों को लेकर कुलपति ने स्पष्ट किया कि यह सीयूईटी के कारण नहीं है।

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यही नहीं कुलपति ने यह भी कहा कि दाखिला कम होने के कारण किसी भी पाठ्यक्रम को बंद नहीं किया जाएगा। सीयूईटी आने के बाद विश्वविद्यालय की दाखिला प्रक्रिया केंद्रीकृत सिस्टम के साथ अधिक तार्किक, पारदर्शी और जवाबदेह हो गई है। अब हर स्टेकहोल्डर को हर सीट की स्थिति के बारे में पता होता है। दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉमन सीट अलोकेशन सिस्टम (सीएसएएस) एडमिशन सिस्टम में, हर आवंटन को सार्वजनिक किया जाता है, जिसके लिए बहुत ही वैज्ञानिक तरीका अपनाया जाता है। कुलपति ने कहा कि कम से कम राउंड में सीटों के बेहतर आवंटन के लिए कॉलेजों को अपनी सीट मैट्रिक्स पर फिर से विचार करने की सलाह दी गई है। प्रो.योगेश सिंह ने डीयू की दाखिला शाखा के आंकड़ों के आधार पर स्पष्ट किया कि सीयूईटी से पहले जब दाखिले 12वीं कक्षा में मिले अंकों के आधार पर होते थे, तब भी कुछ सीटें खाली रह जाती थीं। आंकड़ा जारी कर कहा सीटों से अधिक हुए दाखिले डीयू ने आंकड़ा जारी कर कहा है कि यहां सीटों से अधिक दाखिले हुए हैं। हालांकि किस वर्ग में कितनी सीटें रिक्त रह गई हैं इसकी जानकारी साझा नहीं की गई है। ज्ञात हो कि डीयू के शिक्षक नेता बार बार यह आरोप लगा रहे हैं कि सीयूईटी शुरू होने के बाद खाली सीटों की संख्या में इजाफा हुआ है। सीट भरने के लिए डीयू विगत कुछ वर्षों से पहली सूची के तहत कई कॉलेजों में 10-30 फीसद तक अधिक सीटों पर दाखिला देता आया है। डीयू द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018, 2019 (सीयूईटी से पहले/कोविड से पहले) और 2024, 2025 (कोविड के बाद) के दाखिलों के आंकड़ों के साथ बताया कि 2019 में मेरिट आधारित दाखिलों के समय डीयू में स्नातक की कुल उपलब्ध 70735 सीटों में से 68213 ही भरी गई थी, और 3.56 फीसद सीटें खाली रही थीं। इस बार 2025 में सीयूईटी आधारित दाखिलों के समय कुल उपलब्ध 71642 सीटों के मुकाबले 72229 दाखिले हुए हैं। इस प्रकार 0.65 फीसद दाखिले अधिक हुए हैं। कुलपति ने कहा कि 2019 में, कुल 3.56 फीसद सीटें खाली थीं, जबकि पिछले कुछ सालों में, 2025 में, दाखिले स्वीकृत संख्या से ज्यादा हुए हैं। तुलना से यह भी पता चलता है कि सीयूईटी से पहले दाखिलों को अनिश्चित कट-ऑफ के कारण नियंत्रित नहीं किया जा सकता था। ऐसे भी मामले सामने आए हैं जहां 11 सीटों की क्षमता पर 203 दाखिले किए गए, जो कि तय सीटों से 1745 फीसद अधिक थे। नए सिस्टम से अब अधिक और कम दाखिलों की समस्या नियंत्रित और प्रबंधित की जा सकती है। अब कॉलेज तय करते हैं कि वे हर कोर्स में कितनी अतिरिक्त सीटें देना चाहते हैं। यह डेटा सिस्टमैटिक प्रोसेस के लिए एल्गोरिदम में डाला जाता है। यूनिवर्सिटी अब प्रोग्राम की लोकप्रियता पर अनुमानित विश्लेषण कर सकती है, जिससे दाखिला नीति बनाने में मदद मिलती है। कुलपति ने कहा कि दाखिलों के डेटा का तुलनात्मक गहन विश्लेषण करने से पता चलता है कि सीयूईटी से पहले कट-ऑफ सिस्टम में उन सभी उम्मीदवारों को दाखिला दिया जाता था जो कॉलेज द्वारा घोषित कट-ऑफ को पूरा करते थे। इससे यह पता चलता है कि उन दिनों सीटों की मंजूरी पर अधिक ध्यान नहीं दिया जा सकता था। उन्होंने कहा कि एक खास प्रोग्राम में अधिक और बिना गिनती के दाखिलों के कई मामले होते थे। सीयूईटी के बाद सीएसएएस एडमिशन सिस्टम में उम्मीदवारों द्वारा दी गई प्राथमिकताओं के आधार पर केंद्रीकृत सिस्टम के साथ दाखिला प्रक्रिया अधिक तार्किक,पारदर्शी और जवाबदेह हो गई है। अब हर स्टेकहोल्डर को, सीयूईटी स्कोर के आधार पर आवंटित, हर सीट की स्थिति के बारे में पता होता है। सीएसएएस दाखिला प्रक्रिया में हर आवंटन को सार्वजनिक किया जाता है, जिसके लिए बहुत ही वैज्ञानिक तरीका अपनाया जाता है। डीयू में रिक्त सीटें भरने के लिए कॉलेजों को सीट मैट्रिक्स की समीक्षा का निर्देश दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा है कि विश्वविद्यालय ने सभी कॉलेजों को एक परामर्श जारी किया है, जिसके तहत उन्हें अपने-अपने कॉलेजों में सीट मैट्रिक्स की पुनः समीक्षा करने और कई दौर की आवंटन प्रक्रिया के बावजूद रिक्त रह गई सीटों को भरने के लिए प्रस्ताव देने को कहा गया है। कुलपति के अनुसार, कॉलेज स्तर पर बीए प्रोग्राम के विभिन्न संयोजनों में फेरबदल की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक छात्रों को प्रवेश का अवसर मिल सके। हालांकि विश्वविद्यालय ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी पाठ्यक्रम को बंद नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह पूरी कवायद न्यूनतम संभव आवंटन दौरों में सीटों को अधिकतम रूप से भरने के उद्देश्य से की जा रही है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और योग्य अभ्यर्थियों को प्रवेश से वंचित न होना पड़े। ---- डीयू के प्रयास नाकाफी,पहले की व्यवस्था थी बेहतर:डा.हंसराज सुमन एससी,एसटी ओबीसी टीचर्स फोरम के अध्यक्ष डा.हंसराज सुमन का कहना है कि लगभग 7 हजार सीटें डीयू में आरक्षित वर्ग के छात्रों की खाली हैं। डीयू द्वारा जो प्रयास किया जा रहा है वह नाकाफी है। पहले की एससी एसटी सेल द्वारा कॉलेजों में दाखिला की व्यवस्था बेहतर थी। सीयूईटी के बाद सीटें अधिक खाली हो रही हैं। आखिर क्या कारण है कि 10-30 फीसद अधिक सीटों पर दाखिला देने के बाद भी सामान्य वर्ग की सीटें भर जा रही हैं जबकि आरक्षित वर्ग की सीटें खाली रह जा रही हैं। सीयूईटी के कारण अक्टूबर नवंबर तक दाखिला की प्रक्रिया चल रही है। जबकि आमतौर पर पहले अगस्त या सितंबर तक दाखिला समाप्त हो जाता था।