1400 से अधिक विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल सुविधा शुरू करने जा रहा डीयू
दिल्ली विश्वविद्यालय ने मुखर्जी नगर के पास ढाका में 332.83 करोड़ रुपए की लागत से नए छात्रावास का भूमि पूजन किया। इस परियोजना से 1436 छात्रों को आवासीय सुविधा मिलेगी। कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने बताया...

- मुखर्जी नगर के निकट ढाका में हुआ डीयू के इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस छात्रावास सह आवासीय ब्लॉक का भूमि पूजन -332.83 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा भवन, 1436 विद्यार्थियों को मिलेगी आवासीय सुविधा: प्रो. योगेश सिंह नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता दिल्ली विश्वविद्यालय लंबे समय से छात्रावास की कमी से जूझ रहे विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। राजधानी में शिक्षा के लिए देशभर से आने वाले छात्रों को अकसर निजी मकानों या पीजी आवासों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति पर बोझ पड़ता है बल्कि पढ़ाई पर भी असर पड़ता है। इसी कमी को दूर करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने बड़ा कदम उठाया है।
डीयू के इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस परियोजना के तहत मुखर्जी नगर के पास ढाका परिसर में बनने वाले छात्रावास सह आवासीय ब्लॉक का भूमि पूजन सोमवार को सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर डीयू के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि यह परियोजना छात्रों को अत्याधुनिक आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराएगी और हॉस्टल की कमी को काफी हद तक कम करेगी। उन्होंने बताया कि 332.83 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट में कुल 1436 विद्यार्थियों के लिए रहने की सुविधा होगी। कुलपति ने आगे जानकारी दी कि यह भवन 29445 वर्ग मीटर के प्लॉट पर बनाया जाएगा और इसकी कुल ऊंचाई 35 मीटर होगी। इमारत में ग्राउंड फ्लोर के अलावा नौ मंजिलें होंगी। लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए अलग-अलग छात्रावास बनाए जाएंगे, जिनकी क्षमता समान होगी। प्रत्येक ब्लॉक में 718 विद्यार्थियों को रहने की सुविधा मिलेगी। परियोजना के तहत लड़कों के छात्रावास में 58 एकल आवास, 220 तीन छात्रों को एक साथ रहने के लिए साझा आवास, 38 विवाहित लोगों के लिए आवास और एक मास्टर अपार्टमेंट होगा। लड़कियों के हॉस्टल में भी समान संख्या में आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। अकादमिक हलकों का मानना है कि डीयू में हॉस्टल की कमी वर्षों से एक गंभीर चुनौती रही है। कई छात्र संगठनों ने इस मुद्दे पर बार-बार आवाज उठाई है। मौजूदा छात्रावासों में सीटों की संख्या सीमित होने से अधिकतर छात्रों को निजी आवास पर निर्भर रहना पड़ता है, जहां किराया अधिक होता है और सुरक्षा भी चिंता का विषय रहती है। इस नई परियोजना से उम्मीद की जा रही है कि बड़ी संख्या में छात्रों को बेहतर और सुरक्षित आवासीय विकल्प मिलेंगे। डीयू के छात्र संगठन लंबे समय से हॉस्टल की मांग कर रहे थे।
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