डीयू में एसी की बैठक में एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को मिली स्वीकृति
दिल्ली विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद की बैठक में कई विभागों के लिए एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही, 'स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम ढांचा 2024' के तहत पाठ्यक्रमों को भी स्वीकृति मिली। मेडिकल और एजुकेशन में नए कोर्स भी मंजूर हुए। शिक्षकों ने अपनी समस्याओं को लेकर धरना दिया।

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय अकादमिक परिषद (एसी) की बैठक में डीयू के कई विभागों के लिए एक वर्षीय स्नातकोत्तर के पाठ्यक्रमों को भी स्वीकृति प्रदान की गई। गौरतलब है कि एनईपी 2020 के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय में चार वर्षीय स्नातक का चौथा वर्ष पूर्ण होने जा रहा है। इसलिए आगामी शैक्षणिक स्तर से एक वर्षीय पीजी कोर्स शुरू होने जा रहे हैं। अकादमिक परिषद की इस बैठक के दौरान विभिन्न संकायों के अंतर्गत, 'स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम ढांचा 2024' (पीजीसीएफ) पर आधारित पाठ्यक्रमों को भी स्वीकृति प्रदान की गई। सामाजिक विज्ञान संकाय एवं भाषाओं जैसे कुछ विभागों के विषयों में स्कोप्स जर्नल्स की अनुपलब्धता के कारण पेपर प्रकाशित होने में कठिनाई के मुद्दे पर विचार विमर्श के बाद कुलपति ने सभी विभागों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्र के 20-20 बेस्ट जर्नल्स की लिस्ट बनाएं और 30 दिन के अंदर उसे भेजे।
उन्होंने कहा कि विभाग जर्नल्स के लिए मानदंड तय करें और उनके लिए अंक निर्धारित करें। उसके आधार पर ही नंबर देकर जर्नल्स की वरीयता सूची तैयार करें। बैठक के आरंभ में शून्य काल के दौरान अकादमिक परिषद के सदस्यों ने अनेकों मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की और अपने-अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए।अकादमिक परिषद की अकादमिक मामलों पर स्थायी समिति की सिफारिशों पर विचार के बाद कला संकाय के दर्शनशास्त्र विभाग में दो वर्षीय और एक एमए दर्शनशास्त्र के विभिन्न सेमेस्टरों के पाठ्यक्रमों को स्वीकृति प्रदान की गई। इसी प्रकार पंजाबी, हिन्दी, अंग्रेजी और संस्कृत आदि अनेकों पाठ्यक्रमों को भी स्वीकृति प्रदान की गई।मेडिकल और एजुकेशन में नए कोर्स मंजूरलेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में डीएम (पेडियाट्रिक्स नेफ्रोलोजी) कोर्स शुरू करने को भी एसी मीटिंग में स्वीकृति प्रदान की गई। इसके तहत प्रति वर्ष दो सीटों पर प्रवेश होगा। ‘रिसर्च काउंसिल’ का नाम बदलकर ‘रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल’ करने को भी स्वीकृति प्रदान की गई।‘सेमेस्टर अवे प्रोग्राम’ देगा विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान में पढ़ने की सुविधायूजीसीएफ-2022 के तहत किसी विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान के साथ 'सेमेस्टर अवे प्रोग्राम' शुरू करने पर विचार किया गया। रजिस्ट्रार डॉ विकास गुप्ता ने बताया कि सेमेस्टर अवे प्रोग्राम (एसएपी) एक सहयोगात्मक व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत विश्वविद्यालय में नामांकित छात्र (अर्थात् दिल्ली विश्वविद्यालय के किसी विभाग/केंद्र/कॉलेज में नामांकित छात्र) अपने अध्ययन कार्यक्रम का एक सेमेस्टर किसी विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान (एफएचईआई) में पूरा कर सकते हैं। छात्र द्वारा एफएचईआई से अर्जित क्रेडिट को डिप्लोमा/डिग्री प्रदान करने के उद्देश्य से गिना जाएगा, बशर्ते कि ये क्रेडिट ऐसे कोर्स कंटेंट/पाठ्यक्रम से अर्जित न किए गए हों जो एक-दूसरे से मेल खाते हों।शिक्षकों ने दिया धरना, सेवा शर्तों में सुधार की मांगदिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने कुलपति कार्यालय के बाहर धरना दिया। इसमें बड़ी संख्या में शिक्षकों ने भाग लेकर लंबे समय से लंबित सेवा और शैक्षणिक समस्याओं को उठाया। शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो.वीएस नेगी ने पदोन्नति और नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी, अस्थायी शिक्षकों को वेतन सुरक्षा न मिलने तथा स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा बंद किए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने 12 सरकारी सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों के नियमितीकरण और पूर्व सेवा को मान्यता देने की मांग की। साथ ही विश्वविद्यालय में स्वयम तथा मुक्त ऑनलाइन पाठ्यक्रमों का विरोध भी किया। संघ के संयुक्त सचिव ने स्नातक पाठ्यक्रम ढांचे की समीक्षा, पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विस्तार के लिए अनुदान बढ़ाने की मांग रखी। संघ ने कुलपति को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि मांगें जल्द पूरी न होने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा।
लेखक के बारे में
Abhinaw Upadhyayशॉर्ट बायो : अभिनव उपाध्याय पिछले लगभग 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार हैं और वर्तमान में हिंदुस्तान दैनिक में प्रमुख संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं। शिक्षा, साहित्य, संगीत, कला, सामाजिक मुद्दों, पर्यावरण और राजनीति से जुड़े विषय उनकी विशेष विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं।
परिचय एवं अनुभव
अभिनव उपाध्याय राजधानी की पत्रकारिता दुनिया का एक विश्वसनीय और सक्रिय नाम हैं, जिन्हें समाचार लेखन, विश्लेषण और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर गहरी पकड़ के साथ लगभग दो दशक का अनुभव है। बीते करीब आठ वर्षों से वे हिंदुस्तान दैनिक से जुड़े हैं और दिल्ली के शैक्षणिक संस्थानों, छात्र राजनीति तथा सांस्कृतिक गतिविधियों की व्यापक और शोधपरक कवरेज कर रहे हैं।
करियर का सफर
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साहित्यिक पत्रिका ‘कथादेश’ से की, जिसके बाद ‘आज समाज’ और ‘दैनिक जागरण’ जैसे प्रमुख संस्थानों में विभिन्न बीट्स पर कार्य किया। आज समाज में कार्य करते हुए 1984 के सिख दंगों के 25 वर्ष पूरे होने पर विशेष श्रृंखला तथा दैनिक जागरण में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम, दिल्ली और आजादी के 75 वर्ष पर शैक्षणिक संस्थानों के योगदान से जुड़ी शोधपरक श्रृंखलाएं तैयार कीं। वर्तमान भूमिका में उन्होंने कई महत्वपूर्ण साक्षात्कार, ब्रेकिंग स्टोरी और विशेष पैकेज किए हैं, साथ ही गोवा अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव सहित अनेक प्रमुख आयोजनों की रिपोर्टिंग की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और उपलब्धियां
अभिनव ने पीएचडी, राजनीति विज्ञान में एमए, बीएड और बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (डिप्लोमा) की उपाधियां प्राप्त की हैं। उन्हें संस्कृति मंत्रालय द्वारा मौलाना मोहम्मद अली जौहर पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसके अतिरिक्त रॉयटर का डिजिटल जर्नलिज्म कोर्स तथा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की जूनियर रिसर्च फेलोशिप भी उन्हें प्राप्त है। उनके कई लेख और शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं, विशेषकर भोजपुरी गीतों में सामाजिक चेतना पर उनका शोध उल्लेखनीय है।
सार्वजनिक भूमिका और रुचियां
पत्रकारिता के साथ-साथ वे विभिन्न शैक्षणिक और सार्वजनिक मंचों पर वक्ता, शोधपत्र प्रस्तुतकर्ता, समिति सदस्य और निर्णायक के रूप में सक्रिय रहते हैं। लेखन, संगीत, कुकिंग और यात्रा उनकी प्रमुख रुचियां हैं, जो उनके रचनात्मक व्यक्तित्व को और समृद्ध बनाती हैं।
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