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17 सितम्बर, 2020|11:58|IST

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क्या दिल्ली हिंसा केस में कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर के खिलाफ दर्ज होगी FIR? हाई कोर्ट में सुनवाई आज

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दिल्ली हाई कोर्ट (एचसी) गुरुवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) आंदोलन के दौरान कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के लिए कई नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की दलीलों की सुनवाई करेगा। आपको बता दें नागरिकता कानून को लेकर जारी प्रदर्शन के दौरान ही फरवरी महीने में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे हुए थे।

दलीलों में से एक ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं जैसे कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, परवेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। इनपर नफरत फैलाने वाले भाषण देने के आरोप हैं। दलील में कोर्ट में कहा गया है इस कारण दिल्ली में दंगी भड़की, जिसमें 53 लोग मारे गए और 400 से अधिक घायल हो गए। हालांकि कपिल मिश्रा ने नफरत फैलाने वाले भाषण देने से इनकार किया और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा से खुद को दूर कर लिया।

एक अन्य याचिका में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं पर दंगों से पहले नफरत फैलाने वाले भाषण देने का आरोप लगाया गया था।

26 फरवरी को, मानवाधिकार कानून नेटवर्क ने सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ता हर्ष मंदर की ओर से एक याचिका दायर की थी, जिसमें कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा गया था। आरोप लगाया गया कि इनके भाषण के कारण उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी।

'वकीलों की आवाज' नामक एक संगठन ने अगले दिन याचिका में हस्तक्षेप किया और कांग्रेस और AAP नेताओं के खिलाफ आरोप लगाए।

जमीयत उलमा-ए-हिंद की एक तीसरी याचिका में कहा गया था कि दिल्ली पुलिस को 23 फरवरी और 1 मार्च के बीच दंगा प्रभावित क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित करने का निर्देश दिया जाना चाहिए। याचिका में आरोप लगाया गया था कि दंगों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर नहीं दर्ज किया गया।

दिल्ली पुलिस ने भाजपा नेताओं पर कार्रवाई करने से इनकार करते हुए रविवार रात छात्र नेता उमर खालिद की गिरफ्तारी की। फरवरी में दंगे भड़कने से पहले सीएए के विरोध प्रदर्शन के दौरान खालिद सबसे आगे थे।

 

इस हफ्ते की शुरुआत में नौ सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव को पत्र लिखकर "वास्तविक अपराधियों" को छोड़ देने की आशंका व्यक्त की थी।

पुलिस ने यह सुनिश्चित किया है कि दंगों को सीएए प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग अंजाम दिया गया था, जिन्होंने विरोध स्थलों पर लोगों को एकत्र किया था, भड़काऊ भाषण दिए और सांप्रदायिक हिंसा की योजना बनाई।

इससे पहले, पुलिस ने अदालत को बताया था कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की जांच में ऐसे किसी भी सबूत का खुलासा नहीं हुआ है, जो नेताओं की भूमिका की ओर इशारा करता हो।  पुलिस ने यह भी कहा था कि नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई योग्य सबूत नहीं थे।

कपिल मिश्रा ने 15 जुलाई को कहा था, “यह स्पष्ट है कि मेरे खिलाफ पूरा प्रचार अभियान नकली था। दिल्ली में दंगों का आयोजन करने वाले लोग मेरे खिलाफ फर्जी शिकायतें कर रहे हैं और कुछ अर्बन नक्सलियों ने इसे बढ़ावा देने की कोशिश की है। मेरे खिलाफ फर्जी अभियान उजागर हुआ। मुझे यकीन है कि न केवल दंगाई, बल्कि मीडिया और राजनीति में उनके समर्थक समूहों को कानून द्वारा दंडित किया जाएगा।”

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  • Web Title:Delhi riots case High court to hear pleas against politicians including Kapil Mishra Anurag thakur for hate speech