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नई दिल्ली

सॉफ्टवेयर से फेक ऑडियो-वीडियो की पहचान कर रही दिल्ली पुलिस

हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 05:50 PM
सॉफ्टवेयर से फेक ऑडियो-वीडियो की पहचान कर रही दिल्ली पुलिस

- साइबर सेल भड़काऊ पोस्ट करने वालों पर रख रही पैनी नजर

- तीन साल की जेल और पांच लाख के जुर्माने का है प्रावधान

नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता

दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले आपत्तिजनक, भड़काऊ पोस्ट करने के साथ ही इसे शेयर करने वालों पर पैनी नजर गड़ा रखी है। पुलिस विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए फेक ऑडियो-वीडियो की पहचान कर उसके स्रोत तक पहुंचकर कार्रवाई कर रही है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल और पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। लिहाजा, पुलिस कार्रवाई करने के साथ ही सोशल मीडिया के जरिए लोगों को जागरूक भी कर रही है कि वे आपत्तिजनक पोस्ट साझा न करें।

वीडियो से छेड़छाड़ की जांच

पुलिस की टीम भड़काऊ पोस्ट पर नजर रखने के साथ ही वायरल हो रहे वीडियो व ऑडियो की जांच कर रही है कि उनके साथ किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं की गई है। साइबर सेल ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर मंगाया है, जिससे वीडियो व ऑडियो के फेक होने का पता चल जाता है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो-ऑडियो की सच्चाई जानने के लिए दिल्ली पुलिस इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रही है।

पेज, ग्रुप व शेयर पोस्ट के यूआरएल की जांच

नफरत भरे पोस्ट वाले पेज, ग्रुप और शेयर किए गए कंटेंट के यूआरएल की जांच के लिए भी एक टीम काम कर रही है। इसके लिए तकनीकी स्तर पर जांच की जा रही है कि किस जगह से संबंधित यूआरएल जनरेट हुआ है। इसके बाद सोशल मीडिया के भारतीय प्रतिनिधियों से कानून के तहत जानकारी मांगकर ऐसे यूआरएल को डिलीट कराने की कार्रवाई भी की जा रही है।

वॉलंटियर की मदद

दिल्ली पुलिस सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले भड़काऊ पोस्ट, वीडियो, ऑडियो, फोटो की जानकारी मिलने पर उसकी जांच कर रही है। ऐसे पोस्ट की निगरानी करने के लिए पुलिस साइबर जानकारों के साथ ही डिजिटल वालंटियर की भी मदद ले रही है।

आईटी एक्ट के बारे में जानें

इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी यानी आईटी एक्ट 2000 की धारा 67 में प्रावधान है कि अगर कोई इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आपत्तिजनक पोस्ट करता है या फिर ऐसे पोस्ट को शेयर करता है तो उसके खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता है। आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत अगर कोई पहली बार सोशल मीडिया पर ऐसा पोस्ट करने का दोषी पाया जाता है, तो उसे तीन साल की जेल हो सकती है। साथ ही पांच लाख रुपये का जुर्माना भी देना पड़ सकता है। वहीं, ऐसा अपराध दोहराए जाने पर दोषी को पांच साल की जेल के साथ ही 10 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है।

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