
संपादित----सफाई का बजट घटाया, शिक्षा और स्वास्थ्य का बढ़ाया
:::निगम का बजट:: शोल्डर- निगम की स्थायी समिति में 16,530.50 करोड़ रुपये का बजट
नई दिल्ली, वरिष्ठ संवाददाता। दिल्ली नगर निगम के नए वित्तीय वर्ष 2026-27 का कुल 16,530.50 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया। इसमें साफ-सफाई के बजट में कमी के साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बजट को बढ़ाया गया है। इसके साथ ही राहत की बात यह है कि इस वित्तीय वर्ष में कोई अतिरिक्त कर लगाने का प्रस्ताव नहीं लाया गया है। निगम ने सफाई के बजट में 111.83 करोड़ रुपये घटाया है, जबकि शिक्षा के बजट को 826.61 करोड़ रुपये बढ़ाया। जन स्वास्थ्य विभाग के बजट को 72.09 करोड़ रुपये व पशु चिकित्सा विभाग के बजट में 22.63 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की है।

साथ ही, निगम ने नए वित्तीय वर्ष 2026-27 में सामान्य प्रशासन पर 25.4 करोड़ रुपये, बागवानी में 4.65 करोड़ रुपये, सामुदायिक सेवाओं में 3.36 करोड़ रुपये और लाभकारी परियोजनाओं के लिए 26.3 करोड़ रुपये की वृद्धि की है। अब इस बजट को निगम की स्थायी समिति, सदन में और निगम की समितियों में पेश करते हुए इस पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद सभी के सुझावों के मद्देनजर बजट को अंतिम रूप दिया जाएगा। निगम आयुक्त अश्वनी कुमार ने प्रदूषण के मुद्दे पर निगम की योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष मार्च तक निगम के अधीन आने वाली 600 सड़कों का निर्माण करेंगे। इससे इन सड़कों पर धूल प्रदूषण नहीं फैलेगा। सड़कों की सफाई के लिए नई मकैनिकल स्वीपिंग मशीनों को भी खरीदा जाएगा। स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने बजट सत्र खत्म होने के बाद निगम प्रशासन और अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि निगम के सदन में कई प्रस्ताव सीधे लाए जाते हैं। उसे स्थायी समिति में नहीं लाया जाता। यह निगम की स्थायी समिति में चर्चा पर लाए जाने चाहिए। इस मुद्दे पर निगम आयुक्त ने कहा कि जिस परियोजना पर पांच करोड़ रुपये से अधिक की लागत होती है उसे स्थायी समिति में लाया जाता है। पांच करोड़ रुपये से कम फंड के प्रोजेक्ट को सदन में लाया जाता है। यह निगम के अधिनियम में भी सम्मिलित है। 20 मल्टी लेवल पार्किंग बनेगी निगम आयुक्त अश्वनी कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद निगम 20 स्थानों पर मल्टी लेवल कार पार्किंग को तैयार करने के लिए जगहों को चिह्नित कर रहा है। इससे लोगों को गाड़ी खड़ी करने में सहूलियत होगी और निगम को राजस्व की प्राप्ति होगी। ------------ दो कर को समायोजित करेंगे फैक्टरी लाइसेंस और जनरल ट्रेड लाइसेंस के बाद अब निगम रेस्तरां और अन्य खान पान के स्थानों को जारी होने वाले स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस को भी संपत्ति कर में समायोजित किया जाएगा। आयुक्त ने कहा कि हम स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस को संपत्ति कर के दायरे में लाने पर काम कर रहे हैं। ------------ यूजर चार्ज नए तरीके से तैयार होंगे आयुक्त ने संकेत दिया है कि कूड़ा उठाने के लिए संपत्ति कर के साथ यूजर चार्ज को लगाने के फैसले को नए तरीके से तैयार करेंगे। देशभर में कई निगमों में यूजर चार्ज वसूला जाता है। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष अप्रैल में निगम प्रशासन ने कूड़ा उठाने के लिए यूजर चार्ज वसूलने का फैसला लिया था, जिसे भाजपा ने निगम में सत्ता में लौटने के बाद वापस ले लिया था। --------------- निगम पर 15 हजार करोड़ रुपये का कर्ज निगम आयुक्त ने बताया कि निगम पर 15 हजार 751 करोड़ रुपये की देनदारी है। इसके अतिरिक्त लगभग सात हजार करोड़ रुपये कर्मचारियों के एरियर भी देने हैं। कई ठेकेदारों को भी पैसे देने हैं। ------- राजस्व बढ़ाने पर काम करेंगे आयुक्त ने कहा कि निगम के राजस्व को बढ़ाने पर काम करेंगे। इसके लिए संपत्ति कर समेत अन्य सोर्स से आय बढ़ाएंगे विभिन्न मदों में दिए गए बजट सफाई- 4795.28 करोड़ रुपये सामान्य प्रशासन- 3549.63 करोड़ रुपये लोक निर्माण कार्य- 1884.44 करोड़ रुपये जन स्वास्थ्य- 1833.51 करोड़ रुपये शिक्षा- 2520.34 करोड़ रुपये पशु चिकित्सा सेवा- 131.06 करोड़ रुपये बागवानी- 397.91 करोड़ भूमि, लाभकारी परियोजना- 118.20 करोड़ रुपये अन्य विकास खर्च- 475.10 करोड़ रुपये लाइसेंसिंग विभाग- 10.42 करोड़ रुपये सामुदायिक सेवा- 74.73 करोड़ रुपये कर्ज भुगतान- 667.80 करोड़ रुपये कुल- 16,530.50 करोड़ रुपये

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