दिल्ली में बारिश जलसंचयन होगा अनिवार्य, सरकारी इमारतों पर होगी सख्ती
इसका पालन जिन जगहों पर नहीं होगा, वहां की जाएगी कार्रवाई-प्रवेश साहिब सिंहनई दिल्ली प्रमुख संवाददाता दिल्ली में बढ़ती जल चुनौती से निपटने के लिए बारिश जलसंचयन को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।...

इसका पालन जिन जगहों पर नहीं होगा, वहां की जाएगी कार्रवाई-प्रवेश साहिब सिंह नई दिल्ली प्रमुख संवाददातादिल्ली में बढ़ती जल चुनौती से निपटने के लिए बारिश जलसंचयन को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। सोमवार को जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पूरे शहर में बारिश जलसंचयन को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा और इसकी सख्त निगरानी होगी। पहले चरण में सरकारी इमारतों में इसे अनिवार्य किया जाएगा और इसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य जगहों पर भी इसे लागू किय जाएगा।बैठक में अधिकारियों को संबोधित करते हुए मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि दिल्ली में पर्याप्त वर्षा होती है, लेकिन उसका सही उपयोग नहीं हो पाता।
प्रत्येक वर्ष चार महीने तक बारिश का पानी हमारे नालों से बह जाता है। यदि हम इस पानी को जमीन में उतारें, तो भूजल स्तर बढ़ाकर जल संकट को कम कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सभी विभागों को स्पष्ट और समयबद्ध लक्ष्य दिए गए हैं। सरकारी इमारतों, पार्कों, रिहायशी कॉलोनियों और संस्थागत परिसरों में मानसून से पहले कार्यशील रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही बड़े रिहायशी प्लॉट्स, ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों और संस्थागत क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि सबसे पहले सरकारी इमारतों को उदाहरण पेश करना होगा। जहां सिस्टम नहीं हैं, वहां तुरंत लगाए जाएं और जहां पहले से मौजूद हैं, उन्हें मानसून से पहले पूरी तरह कार्यशील बनाया जाए। दिल्ली जल बोर्ड को इस अभियान के क्रियान्वयन और निगरानी में केंद्रीय भूमिका दी गई है। बोर्ड न केवल रेन वॉटर हार्वस्टिंग सिस्टम लगाने में सहयोग करेगा, बल्कि आर्थिक प्रोत्साहन भी देगा। दिल्ली जल बोर्ड लागत का एक हिस्सा वहन करेगा और जहां रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कार्यशील होंगे, वहां 10 फीसदी की छूट भी दी जाएगी। वहीं, यदि सिस्टम स्थापित नहीं किए गए या उनका रखरखाव नहीं हुआ, तो यह छूट वापस ली जा सकती है।प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा था पालनप्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि अब तक भवन स्वीकृति के दौरान रेन वॉटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य तो थी, लेकिन प्रभावी जांच की कमी के चलते इसका पालन ठीक से नहीं हो रही था। यह नियम तो था, लेकिन उसकी वास्तविक जांच नहीं होती थी। अब इसमें बदलाव होगा। हम एक ऐसी व्यवस्था लाएंगे जिसमें सत्यापन और जवाबदेही सुनिश्चित होगी, ताकि यह जमीन पर लागू हो- सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे। इसके लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी।स्व-घोषणा प्रणाली होगी लागूमंत्री ने कहा कि एक स्व-घोषणा प्रणाली भी लागू की जाएगी, जिसके तहत संपत्ति मालिक हर वर्ष यह प्रमाणित करेंगे कि उनका सिस्टम कार्यशील है। इससे निरंतर अनुपालन सुनिश्चित होगा और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी। उन्होंने कहा कि इसमें सरकार और निजी क्षेत्र- दोनों की भागीदारी जरूरी है। यह सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। चाहे सरकारी दफ्तर हो या निजी मकान, हर किसी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। पानी सबकी साझा जिम्मेदारी है।
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