
हाईकोर्ट ने आरोपी को बरी करने के आदेश का बरकरार रखा
दिल्ली उच्च न्यायालय ने लूट के एक मामले में आरोपी को बरी करने के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि निचली अदालत का निर्णय गलत या तथ्यों से परे होने पर ही हस्तक्षेप किया जा सकता है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अपील के दौरान मामले की पहले ही विस्तार से सुनवाई हो चुकी है।
नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने लूट के एक मामले में आरोपी को बरी किए जाने के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए अभियोजन की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बरी के आदेश में हस्तक्षेप तभी किया जा सकता है, जब निचली अदालत का फैसला स्पष्ट रूप से गलत या तथ्यों से परे हो। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने नवंबर 2014 में सत्र अदालत द्वारा पारित बरी के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि कानून का स्थापित सिद्धांत है कि बरी के खिलाफ अपील पर उच्च न्यायालय को अत्यंत सावधानी से विचार करना चाहिए और प्रत्येक तथ्य व साक्ष्य का गहन परीक्षण करना चाहिए।
अदालत ने कहा कि इस मामले में सत्र अदालत ने उपलब्ध सबूतों और गवाहों के बयान का समुचित मूल्यांकन कर आरोपियों को बरी किया था। ऐसे में केवल अलग राय के आधार पर उस फैसले में दखल नहीं दिया जा सकता। पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि अपील के दौरान मामले पर पहले ही दो बार विस्तार से सुनवाई हो चुकी है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बरी होने के आधारों को गलत ठहराने का कोई ठोस कारण नहीं है। इसके साथ ही पूर्वी दिल्ली में हुई लूट से जुड़े इस मामले में आरोपियों की बरी को अंतिम रूप दे दिया गया।

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