
पीएफआई की याचिका पर सुनवाई का अधिकार : हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि उसे पीएफआई की याचिका पर विचार करने का अधिकार है। पीएफआई ने यूएपीए न्यायाधिकरण के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की है। कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। मामले...
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि उसे पीएफआई की एक याचिका पर जारी आदेश के अनुसार गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम न्यायाधिकरण के आदेश के खिलाफ याचिका पर विचार करने का अधिकार है। हाईकोर्ट ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) द्वारा उस न्यायाधिकरण के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को विचारणीय मानते हुए कहा कि न्यायाधिकरण को सौंपे गए कार्यों की तुलना सिविल कोर्ट के कार्यों से नहीं की जा सकती। अपने आदेश में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को एक नोटिस भी जारी कर छह सप्ताह में जवाब देने को कहा। केंद्र ने आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकवादी संगठनों के साथ कथित संबंधों और देश में सांप्रदायिक नफरत फैलाने की कोशिश करने के आरोप में पीएफआई पर पांच साल का प्रतिबंध लगाया था।

पीएफआई ने तर्क दिया कि याचिका विचारणीय नहीं है क्योंकि यूएपीए न्यायाधिकरण का नेतृत्व हाईकोर्ट के एक वर्तमान जज कर रहे हैं। इसलिए अनुच्छेद 226 के तहत आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती। मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ केन्द्र के इस तर्क से सहमत नहीं थी। पीठ ने पीएफआई को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय भी दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी, 2026 के लिए सूचीबद्ध कर दी गई है।

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