
हाईकोर्ट ने मरीजों के परिजनों की बुरी हालत पर स्वत: संज्ञान लिया
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अस्पतालों के बाहर ठंड की रातों में मरीजों और उनके तीमारदारों की दयनीय स्थिति पर स्वतः संज्ञान लिया है। न्यायालय ने रैन बसेरों की कमी और सुविधाओं के अभाव को लेकर सरकार से सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया। यह कदम सर्दियों में गरीबों की स्थिति सुधारने के लिए आवश्यक है।
नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजधानी में अस्पतालों के बाहर ठंड की रातों में मरीजों और उनके तीमारदारों की दयनीय स्थिति पर स्वतः संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने 11 जनवरी की एक समाचार रिपोर्ट पर ध्यान देते हुए कहा कि रैन बसेरों की कमी और अपर्याप्त सुविधाओं के कारण लोग ठंड में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। पीठ ने इस जनहित मुद्दे को खुद से याचिका के रूप में रजिस्टर करने का आदेश दिया और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय, आवास और शहरी विकास मंत्रालय समेत मुख्य मंत्रालयों को प्रतिवादी बनाया।
न्यायालय ने दिल्ली सरकार के साथ मिलकर राजधानी के रैन बसेरों पर नियंत्रण रखने का निर्देश भी दिया। पीठ ने यह आदेश दिया कि याचिका उसी दिन संबंधित पीठ में सूचीबद्ध की जाए जो जनहित याचिका मामलों की सुनवाई करती है। अखबार की रिपोर्ट की एक प्रति रिकॉर्ड का हिस्सा होगी और इसे आदेश के साथ संलग्न रखा जाएगा। उच्च न्यायालय ने कहा कि यह कार्रवाई विशेष रूप से सर्दियों के पीक सीजन में जरूरी है, जब बड़े सरकारी अस्पतालों के बाहर गरीब और कमजोर वर्ग के मरीजों और उनके परिवारों के लिए बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी देखी जाती है। पीठ ने यह भी कहा कि सरकारी उपायों की प्रभावशीलता की जांच की जाए और उन पक्षों पर ध्यान दिया जाए, जो अपने कर्तव्यों में लापरवाह रहे, जिससे नागरिकों को इस तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस निर्णय के तहत दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों में इलाज का इंतजार करने वालों और उनके तीमारदारों की स्थिति पर तत्काल और ठोस कदम उठाना जरूरी है, ताकि राजधानी में मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




