
हाईकोर्ट ने ई-रिक्शा नियमों पर सरकार से जवाब मांगा
दिल्ली उच्च न्यायालय ने ई-रिक्शा संचालन के संबंध में दिल्ली सरकार, परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि अनियंत्रित ई-रिक्शा संचालन आमजन की सुरक्षा के लिए खतरा है, जिसमें एक सड़क दुर्घटना में एक बच्ची की मौत का मामला भी शामिल है। अदालत ने संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है।
नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजधानी में ई-रिक्शा संचालन को लेकर गंभीर रुख अपनाते हुए बुधवार को दिल्ली सरकार, परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस और एमसीडी से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ मनीष पाराशर द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में ई-रिक्शा के अनियंत्रित संचालन को आमजन की सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, पिछले वर्ष एक सड़क दुर्घटना में उनकी आठ वर्षीय बेटी की मौत हो गई थी। बच्ची ई-रिक्शा से स्कूल जा रही थी, तभी तेज रफ्तार ई-रिक्शा पलट गया। याचिका में कहा गया कि संबंधित ई-रिक्शा का न तो बीमा था और न ही वह वैध रूप से उस सड़क पर चलने की अनुमति रखता था।
पीठ ने सभी संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर ई-रिक्शा संचालन से जुड़े नियमों और अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च तय करते हुए निर्देश दिया कि सभी प्रतिवादी शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करें। याचिका में ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि 1 जनवरी से 20 अगस्त 2025 के बीच ई-रिक्शा से जुड़ी 108 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 26 लोगों की मौत और 130 लोग घायल हुए। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रतिबंध के बावजूद 236 सड़कों पर ई-रिक्शा धड़ल्ले से चल रहे हैं और नियमों का पालन नहीं कराया जा रहा।

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