हरदीप पुरी की बेटी के खिलाफ दायर अपील खारिज
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक सामाजिक कार्यकर्ता की अपील खारिज कर दी, जिसमें उसने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी को जेफ्री एप्स्टीन से जोड़ने वाली सोशल मीडिया पोस्ट हटाने की मांग की थी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एकल जज के समक्ष अपनी शिकायतें रखने का निर्देश दिया और मामले को 23 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक सामाजिक कार्यकर्ता की अपील खारिज कर दी जिसमें उसने केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी को अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन से जोड़ने वाली सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायतें एकल जज के समक्ष रखने को कहा, जिन्होंने यह आदेश दिया था। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति रेनू भटनागर की पीठ ने एकल जज से कहा कि अंतरिम आदेश को जारी रखने या निरस्त करने के मुद्दे पर यथाशीघ्र अंतिम निर्णय लिया जाए। पीठ ने अपीलकर्ता कुणाल शुक्ला को एकल जज के समक्ष हिमायनी पुरी की निषेधाज्ञा याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।
पीठ ने कहा कि मामले को 23 अप्रैल को एकल जज के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए। एकल जज पक्षों की सुनवाई के बाद, बिना किसी पूर्व टिप्पणी से प्रभावित हुए यथाशीघ्र निषेधाज्ञा या स्थगन हटाने के आवेदन पर अंतिम फैसला करेंगे।शुक्ला ने अपनी अपील में आरोप लगाया कि एकल जज ने 17 मार्च को बिना नोटिस दिए या जवाब दाखिल करने का समय दिए आदेश पारित कर उन्हें संबंधित पोस्ट को सोशल मीडिया पर प्रकाशित, प्रसारित या साझा करने से रोक दिया था। हिमायनी पुरी ने अपने मुकदमे में 10 करोड़ रुपये के हर्जाने व कई संस्थाओं को कथित मानहानिकारक सामग्री प्रसारित करने से रोकने की मांग करते हुए दावा किया था कि उन्हें एप्स्टीन व उसके अपराधों से जोड़ने के लिए एक सुनियोजित व दुर्भावनापूर्ण ऑनलाइन अभियान चलाया गया। इससे उनके सम्मान को ठेस पहुंची है।
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