निजी स्कूलों की फीस अधिसूचना लागू रहेगी : हाईकोर्ट

Jan 08, 2026 08:03 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को फीस नियम पैनल बनाने के आदेश पर रोक लगाने से किया इनकार

निजी स्कूलों की फीस अधिसूचना लागू रहेगी : हाईकोर्ट

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को निजी स्कूलों में फीस नियम समिति (एसएलएफआरसी) बनाने से जुड़ी अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन समिति गठन का समय बढ़ा दिया। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस तय करने व नियम में निष्पक्षता) अधिनियम, 2025 और उसके नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (डीओई) और उपराज्यपाल को नोटिस जारी किया और जवाब दाखिल करने को कहा। याचिकाओं में 24 दिसंबर 2025 की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी, जिसमें 2025-26 शैक्षणिक सत्र के लिए स्कूल स्तर फीस नियम समिति बनाने का निर्देश था।

अदालत ने अधिसूचना पर रोक नहीं लगाई, लेकिन समितियों को बनाने का समय 10 जनवरी से बढ़ाकर 20 जनवरी कर दिया। साथ ही स्कूल प्रबंधन द्वारा फीस प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तारीख भी 25 जनवरी से बढ़ाकर 5 फरवरी कर दी गई। अंतरिम आदेश के तहत अदालत ने स्पष्ट किया कि डीओई की 24 दिसंबर की अधिसूचना के अनुसार की जाने वाली कोई भी कार्रवाई भविष्य के आदेशों के अधीन होगी। नए फ्रेमवर्क के तहत हर निजी स्कूल में एसएलएफआरसी बनेगी, जिसमें प्रिंसिपल, स्कूल प्रबंधन प्रतिनिधि, तीन शिक्षक, पांच अभिभावक और डीओई से एक नॉमिनी शामिल होंगे। सदस्य लॉटरी प्रक्रिया के जरिए चुने जाएंगे और समिति 30 दिनों में फीस प्रस्तावों की समीक्षा करेगी। याचिकाकर्ताओं में से एक, एक्शन कमेटी अनएडेड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि अधिसूचना संवैधानिक रूप से गलत है क्योंकि इसे उपराज्यपाल के बजाय डीओई ने जारी किया। अभिभावकों की ओर से अधिवक्ता खगेश बी झा और शिखा शर्मा बग्गा ने कहा कि पिछले दशक से अभिभावक-शिक्षक संघ का चुनाव नहीं हुआ, ऐसे में पांच अभिभावकों का चयन कैसे होगा। डीओई की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एसवी राजू ने कहा कि अधिसूचना निदेशालय भी जारी कर सकता है और अदालत के समय बढ़ाने के सुझाव से सहमत हैं। अदालत ने पैनल बनाने के निर्देश जारी करते हुए यह स्पष्ट किया कि इससे निजी स्कूलों में फीस निर्धारण में निष्पक्षता और नियमितता लाने में मदद मिलेगी।

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