सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन का नाम सर्वोच्च न्यायालय क्यों नहीं हो सकता : हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल निगम से पूछा कि क्यों मेट्रो स्टेशन के हिंदी साइनबोर्ड पर 'सर्वोच्च न्यायालय' नहीं लिखा जा सकता। याचिकाकर्ता ने कहा कि 'सुप्रीम कोर्ट' के बजाय 'सर्वोच्च न्यायालय' लिखना सही होगा। मामला 19 फरवरी को फिर से सुनवाई के लिए रखा गया है।

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली मेट्रो रेल निगम से पूछा कि सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन के हिंदी साइनबोर्ड पर देवनागरी लिपि में सर्वोच्च न्यायालय क्यों नहीं लिखा जा सकता। मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ उमेश शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में मेट्रो स्टेशन के हिंदी साइनबोर्ड पर सर्वोच्च न्यायालय के बजाय सुप्रीम कोर्ट लिखे जाने पर आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ता ने अपनी बात के समर्थन में बताया कि सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन का हिंदी नाम केंद्रीय सचिवालय है। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि न्यायालय की वेबसाइट पर भी हिंदी नाम भारत का सर्वोच्च न्यायालय है।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय प्रशासन ने दिल्ली मेट्रो रेल निगम को एक पत्र भेजकर मेट्रो स्टेशन का नाम सुप्रीम कोर्ट अंकित करने का प्रस्ताव दिया था, जिसे मेट्रो अधिकारियों के एक पैनल ने स्वीकार कर लिया था। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि अनुवाद करने में उन्हें (मेट्रो अधिकारियों को) बहुत आलस आता है। वे गृह मंत्रालय जा सकते हैं। वहां राजभाषा विभाग है। अगर उन्हें कोई समस्या है तो वे अनुवाद करवा सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।
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