बिना अनुमति पेड़ों की छंटाई वाली एसओपी पर रोक

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार की एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर रोक लगा दी है, जो बिना ट्री अधिकारी की अनुमति के 15.7 सेंटीमीटर से कम घेराव वाली शाखाओं की देखभाल की अनुमति देती थी। न्यायालय ने कहा कि यह एसओपी पहले के फैसले के विपरीत है। अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।

बिना अनुमति पेड़ों की छंटाई वाली एसओपी पर रोक

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार की एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अमल पर रोक लगा दी है। इसमें 15.7 सेंटीमीटर से कम घेराव वाली शाखाओं की सामान्य देखभाल व हल्की छंटाई बिना ट्री अधिकारी की पूर्व अनुमति के करने की अनुमति दी गई थी। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा कि यह एसओपी अदालत के पहले दिए गए बाध्यकारी फैसले के विपरीत है। पीठ ने कहा कि 2 मई 2025 को दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 33 के तहत जारी अधिसूचना के जरिए सरकार वर्ष 2023 में दिए गए अदालत के फैसले को निष्प्रभावी करने की कोशिश कर रही है।

उस फैसले में स्पष्ट कहा गया था कि कानून के तहत ऐसी छूट नहीं दी जा सकती। मामले की सुनवाई भवरीन कंधारी द्वारा दायर अवमानना याचिका पर हो रही है।पीठ ने कहा कि इस अधिसूचना के जरिए प्रतिवादी 29 मई 2023 के फैसले को पलटने का प्रयास कर रहे हैं, जो स्वीकार्य नहीं है। पीठ ने अगली सुनवाई तक एसओपी के अमल पर रोक लगा दी है। वहीं, प्रतिवादियों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।

Hemlata Kaushik

लेखक के बारे में

Hemlata Kaushik

शॉर्ट बायो : हेमलता कौशिक पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'हिन्दुस्तान' में दिल्ली हाई कोर्ट से संबंधित खबरें करती हैं।


परिचय एवं अनुभव
हेमलता कौशिक को पत्रकारिता में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कोर्ट रिपोर्टिंग टीम का हिस्सा हैं। इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने कई ब्रेकिंग खबरें की हैं।


करियर का सफर (प्रिंट पत्रकारिता)
एचटी में उन्हें कार्य करते हुए 17 वर्ष हो गए हैं। एक वर्ष उन्होंने पंजाब केसरी में कार्य किया है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन(बीजेएमसी), एम ए राजनीति शास्त्र, कानून स्नात्तक (एलएलबी)।


विशेषज्ञता
कानूनी मामले (अदालत की रिपोर्टिंग), उपभोक्ता अधिकार संबंधी मामले, केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण(कैट नौकरी संबंधी प्रशासनिक आदेश), दिल्ली महिला आयोग के माध्यम से महिलाओं के हक की लड़ाई व मानवीय पहलु से संबंधित ज्वलंत मुद्दों पर विशेष दृष्टि, दिल्ली सरकार के मध्यस्थता केन्द्र में पारिवारिक विवादों व उनसे परिवार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों की राय पर आधारित मामलों पर विशेष ध्यान। किशोर न्याय बोर्ड में नाबालिगों के आने वाले मामलों पर उनकी मनोस्थिति व बदलती धारणा पर नजर बनाए रखना।

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