जेईई अभ्यर्थी को दोबारा परीक्षा देने की अनुमति
दिल्ली हाईकोर्ट ने जेईई-2026 की मुख्य परीक्षा में बायोमीट्रिक गड़बड़ी के कारण प्रभावित अभ्यर्थी श्लोक भारद्वाज को दोबारा परीक्षा देने की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता केवल परीक्षा कक्ष में प्रवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि अभ्यर्थी की मानसिक शांति भी महत्वपूर्ण है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की निष्पक्षता केवल परीक्षा कक्ष में प्रवेश देने तक सीमित नहीं होती बल्कि यह भी जरूरी है कि अभ्यर्थी को ऐसे प्रक्रियात्मक झटकों का सामना न करना पड़े जो उसकी मानसिक शांति और एकाग्रता को भंग कर दें। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने जेईई-2026 की मुख्य परीक्षा (सेशन-I) में बायोमीट्रिक गड़बड़ी से प्रभावित अभ्यर्थी को दोबारा परीक्षा देने की अनुमति दी है। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जस्मीत सिंह की पीठ ने की। याचिकाकर्ता श्लोक भारद्वाज परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचा था। लेकिन आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन में बार-बार विफलता के कारण परीक्षा शुरू होने से पहले उनकी पहचान की पुष्टि नहीं हो सकी।
इस प्रक्रिया में उनका आधार काफी देर तक ब्लॉक रहा जिससे उन्हें परीक्षा के दौरान गहरी बेचैनी व तनाव का सामना करना पड़ा। सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने अपनी शिकायत निवारण समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि परीक्षा के दौरान कोई बार-बार बाधा नहीं आई। अभ्यर्थी को बिना रुकावट कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच मिली। एजेंसी ने यह भी बताया कि उन्होंने 68 प्रश्न देखे और 28 प्रश्न हल किए, जिससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि उन्हें कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ। हालांकि पीठ ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। पीठ ने कहा कि परीक्षा देना कोई वैज्ञानिक फार्मूला नहीं है जहां केवल आंकड़ों से निष्कर्ष निकाला जा सके।
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