
उच्च न्यायालय ने दिल्ली के 27 औद्योगिक क्षेत्रों में सीवर लाइन, बरसाती नालों के अभाव पर नाराजगी जताई
संक्षेप: दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजधानी के 27 औद्योगिक क्षेत्रों में सीवर और जल निकासी सुविधाओं की कमी पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को 10 नवंबर तक बैठक करने और 15 नवंबर तक सुधारात्मक कार्ययोजना प्रस्तुत करने का आदेश दिया। अधिकारियों की लापरवाही से भूजल प्रदूषण और यमुना में बिना उपचारित पानी के जाने का खतरा बढ़ गया है।
नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजधानी के 27 अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों में सीवर लाइन और बरसाती नालों जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे बेहद दयनीय और चौंकाने वाली स्थिति बताते हुए दिल्ली के मुख्य सचिव राजीव वर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव (औद्योगिक) बिपुल पाठक, डीएसआईआईडीसी प्रबंध निदेशक नाजुक कुमार, नगर निगम आयुक्त अश्विनी कुमार और डीपीसीसी सचिव संदीप मिश्रा को अगली सुनवाई पर अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि ये अधिकारी 10 नवंबर तक संयुक्त बैठक करें और 15 नवंबर तक स्थिति सुधारने के लिए उचित कार्ययोजना की रिपोर्ट जमा करें।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। इसमें दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों के पुनर्विकास और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी खामियों पर चर्चा हो रही है। कोर्ट ने कहा कि अगस्त 2023 में दिल्ली कैबिनेट ने इन औद्योगिक क्षेत्रों के पुनर्विकास का फैसला किया था, लेकिन आज तक यह साफ नहीं है कि सीवर और जल निकासी तैयार करने की जिम्मेदारी किस संस्था की है। कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई कि बिना सीवेज इन्फ्रास्ट्रक्चर के उद्योग संचालित हो रहे हैं, जिससे भूजल प्रदूषण और यमुना में बिना उपचारित पानी जाने का खतरा है। कोर्ट ने साथ ही पुनर्विकास का सर्वे कर रही तीन कंसल्टेंट एजेंसियों के प्रतिनिधियों को 22 नवंबर को उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि बार-बार निर्देशों और बैठकों के बावजूद किसी भी एजेंसी ने जिम्मेदारी लेने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई, जो दिल्ली की शासन व्यवस्था और समन्वय तंत्र में गंभीर कमी दर्शाता है।

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