गैर-इरादतन हत्या मामले में एक माह अस्पताल में सेवा देगी युवती
अदालत से पारिवारिक विवाद में युवती ने अभिभावकों पर किया था हमला बाद में

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महिला के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या की कोशिश के कथित अपराध के लिए आपराधिक कार्रवाई रद कर दी है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने इस मामले में आरोपी युवती को अस्पताल में सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया है। इस मामले में याचिका दायर करने वाली आरोपी युवती अनाथ है। इस युवती को शिकायत करने वाली महिला व उसके पति (जिसकी अब मृत्यु हो चुकी है) ने तब से पाला था जब वह तीन महीने की थी। हालांकि, वे गोद लेने के जरिए कभी उसके कानूनी माता-पिता नहीं बने, लेकिन उच्च न्यायालय ने कहा कि उनका रिश्ता सामाजिक व भावनात्मक रूप से एक मां और बेटी जैसा ही है।
इस मामले में कानूनी परेशानी वर्ष 2019 में एक हिंसक घटना के बाद शुरू हुई। इस घटना में आरोपी युवती ने कथित तौर पर अपने अभिभावकों पर लकड़ी के डंडे व चाकू से हमला किया था। पुलिस ने हत्या की कोशिश के गंभीर आरोपों के तहत मामला दर्ज किया। हालांकि, बाद में अभिभावकों ने युवती को माफ कर दिया था। इस मामले की शिकायतकर्ता ने उच्च न्यायालय में कहा कि वह अब इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। शिकायतकर्ता महिला ने कहा कि उनका विवाद पारिवारिक था। बाद में इन लोगों में समझौता हो गया था और मामले को सुलझाा लिया गया। सेंट स्टीफन अस्पताल में करनी होगी सेवा पीठ ने आरोपी से कहा है कि बेशक मुकदमा रद कर दिया गया है, लेकिन उसे चार महीने के भीतर 30 दिन तक सेंट स्टीफन अस्पताल में सामुदायिक सेवा करनी होगी। पीठ ने कहा कि अस्पताल में उससे किस तरह की सेवा ली जाएगी, इसका निर्णय अस्पताल प्रशासन करेगा। सेवा पूरी होने पर अस्पताल प्रशासन अदालत में रिपोर्ट दाखिल करेगा, उसके बाद इस मुकदमे की फाइल को बंद कर दिया जाएगा।
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