
ओआरएसएल लेबल वाले पेय पदार्थ का स्टॉक वापस ले कंपनी : हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने ओआरएसएल नामक कंपनी को उसके इलेक्ट्रोलाइट पेय पदार्थों के मौजूदा स्टॉक को निपटाने के लिए कोई समय देने से इनकार कर दिया। एफएसएसएआई ने उत्पाद की गलत ब्रांडिंग के कारण इसे ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट (ओआरएस) के रूप में लेबल करने पर रोक लगा दी। यह मामला जन स्वास्थ्य से जुड़ा है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक कंपनी को ओआरएसएल नाम से बेचे जा रहे इलेक्ट्रोलाइट पेय पदार्थों के मौजूदा स्टॉक को निपटाने के लिए कोई समय देने से इनकार कर दिया। ओआरएसएल को एफएसएसएआई द्वारा ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट (ओआरएस) के रूप में लेबल करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि आरोप यह नहीं है कि यह उत्पाद हानिकारक है, बल्कि यह गलत ब्रांडिंग का मामला है। वह ऐसे उत्पादों को बाजार में बने रहने की अनुमति नहीं दे सकते क्योंकि यह मामला जन स्वास्थ्य से जुड़ा है।
पीठ ने याचिकाकर्ता कंपनी जेएनटीएल कंज्यूमर हेल्थ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के वकील से कहा कि माफ कीजिए इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। स्टॉक वापस ले लें। पीठ ने कहा कि मुश्किल यह है कि ग्रामीण इलाकों में अगर कोई बच्चा दस्त से पीड़ित होता है, तो आमतौर पर वे इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करने के लिए ओआरएस खरीदते हैं। आप अपने उत्पाद में इलेक्ट्रोलाइट्स भी लिख रहे हैं, इससे गुमराह होने की संभावना है। पीठ ने केन्द्र व भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (फएसएसएआई) को उस मुख्य याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका में प्राधिकरण के 14 व 15 अक्तूबर के आदेशों को चुनौती दी गई है। आदेश के तहत उसने खाद्य एवं पेय पदार्थ कंपनियों को अपने लेबलिंग में ओआरएस शब्द के इस्तेमाल की अनुमति वापस ले ली थी, जब तक कि वे मानक चिकित्सा फॉर्मूलेशन को पूरा न करें।

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