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संपादित---दूसरी शादी करने पर सीआरपीएफ कर्मी की बर्खास्तगी रद्द

संपादित---दूसरी शादी करने पर सीआरपीएफ कर्मी की बर्खास्तगी रद्द

संक्षेप: दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीआरपीएफ के एक कर्मचारी की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है, जिसने पारंपरिक तलाक लेने के बाद दूसरी शादी की थी। न्यायालय ने कहा कि बर्खास्तगी एक अतिवादी कदम था और इससे कर्मचारी का...

Sat, 18 Oct 2025 07:33 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक कर्मी की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है। उसने ग्राम पंचायत की उपस्थिति में अपनी पहली पत्नी से पारंपरिक तलाक लेने के बाद दूसरी शादी कर ली थी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि मौजूदा मामले की परिस्थितियों में याचिकाकर्ता को सेवा से बर्खास्त करना न्याय का उपहास होगा। न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया और बाद में अपील और पुनरीक्षण में उसके खिलाफ एक आदेश पारित किया। पीठ ने कहा कि सेवा से बर्खास्तगी एक अतिवादी कदम है।

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इससे कर्मचारी का परिवार अस्त-व्यस्त हो जाता है। परिवार की आजीविका का स्रोत अचानक ठप हो जाता है। इसलिए यह कोई उचित कदम नहीं है। खासकर जहां कर्मचारी के खिलाफ आरोप में नैतिक पतन या वित्तीय या ऐसी ही कोई अनियमितता शामिल न हो। पीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को सेवा में बने रहने वाला माना जाएगा। सेवा में निरंतरता के बाद मिलने वाले सभी लाभों का वह हकदार होगा, जिसमें वरिष्ठता और वेतन निर्धारण के लाभ शामिल हैं। पेश मामले में याचिकाकर्ता शैलेंद्र कुमार को रैपिड एक्शन फोर्स, जालंधर की 114वीं बटालियन के कमांडेंट द्वारा 27 फरवरी 2023 को पारित आदेश द्वारा सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। उन्होंने इस आदेश के खिलाफ अपील व बाद में एक पुनरीक्षण याचिका दायर की, जिसे 19 मई 2023 व 23 नवंबर 2023 को खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता के खिलाफ तीन आरोप थे, जिनमें यह भी शामिल था कि याचिकाकर्ता ने 30 मई 2021 को संगीता दूधनाथ विश्वकर्मा नामक महिला से विवाह किया था, जबकि उसकी पहली पत्नी चंद्र किरण के साथ उसका विवाह कायम था। इस मामले में पीठ ने कहा कि शादी भंग होने का मामला दीवानी अदालत में चलने के बाद ही तय किया जा सकता। जबकि इस मामले में सीधे फैसला सुना दिया गया। यह उचित नहीं था।