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उच्च शिक्षा पाना मौलिक अधिकार: हाईकोर्ट

उच्च शिक्षा पाना मौलिक अधिकार: हाईकोर्ट

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Jan 12, 2026 04:18 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि उच्च या तकनीकी शिक्षा पाने का अधिकार किसी व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, जिसे कम नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा कि उच्च या तकनीकी शिक्षा पाने का अधिकार भले ही भारत के संविधान के अनुसार मौलिक अधिकार के रूप में साफ तौर पर नहीं बताया गया, लेकिन यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वह इस अधिकार को सुनिश्चित करे। पीठ ने अभ्यर्थी हर्षित अग्रवाल द्वारा दायर याचिका मंजूर कर ली है। हर्षित ने पांच मई 2024 को हुई एनईईटी-यूजी, 2024 परीक्षा दी थी।

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उसे भीमा भाई मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल बालांगीर, ओडिशा में एमबीबीएस कोर्स में दाखिला मिला था, लेकिन बाद में उसके दाखिले को रद्द कर दिया गया। याचिका में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी(एनटीए) को निर्देश देने की मांग की गई कि अग्रवाल को एमबीबीएस कक्षा में शामिल होने दिया जाए। उसके पक्ष में भी वैसा ही आदेश जारी किया जाए जैसा कि एक दूसरे छात्र के पक्ष में दिया गया। पेपर लीक का है मामला दरअसल, इस परीक्षा में पेपर लीक मामले में सीबीआई द्वारा जांच के बाद कुछ नाम हटाए थे। दूसरे उम्मीदवार जिसका हवाला हर्षित अग्रवाल ने इस मामले में दिया है, उसे सीबीआई की संदिग्ध सूची में शामिल होने के बावजूद उच्चतम न्यायालय ने उसे अपनी पढ़ाई जारी रखने व आखिरी सेमेस्टर परीक्षा में बैठने की इजाजत दी थी। स्कोरकार्ड वापस लिया सीबीआई ने कथित एनईईटी-यूजी 2024 परीक्षा में अनियमितताओं के संबंध में अग्रवाल को समन भी भेजा था। हालांकि, उसने एनटीए के कारण बताओ नोटिस का जवाब दिया, लेकिन उसका स्कोरकार्ड वापस ले लिया गया। इसके बाद कॉलेज ने उसका दाखिला रद्द कर दिया था। सीबीआई ने दलील दी कि इस मामले में पहले ही आरोपपत्र दायर किया जा चुका है। अग्रवाल इस आरोपपत्र के अनुसार आरोपी नहीं है। उसे केवल एक गवाह के रूप में नामित किया गया। अग्रवाल को राहत देते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि उसे कॉलेज में उसकी मेरिट के आधार पर दाखिला दिया गया। अगर इसे रद्द किया जाना है तो इसके लिए कुछ वैध, वास्तविक व ठोस कारण होने चाहिए।