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नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। राजधानी में लगातार बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए दिल्ली सरकार ने व्यापक और दूरदर्शी तैयारियां कर ली हैं। इस संबंध में बिजली वितरण कंपनियों के साथ पहले से समन्वय स्थापित किया जा चुका है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि दिल्ली को विकसित, आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल राजधानी बनाने के लिए सुदृढ़, विश्वसनीय और भविष्य के अनुरूप बिजली प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। सरकार बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए पारेषण और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हाल ही में बिजली व्यवस्था को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें मौजूदा कार्यों और वर्ष 2029 तक की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में बिजली मंत्री आशीष सूद, बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल) और राजधानी की सभी डिस्कॉम के प्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि दिल्ली में अगले तीन वर्षों के दौरान लगभग 17,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत व्यय योजना लागू की जाएगी। इसके तहत पारेषण लाइनों, ग्रिड सब-स्टेशनों और वितरण नेटवर्क को आधुनिक और सशक्त बनाया जाएगा। 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा रही मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बड़े निवेश का उद्देश्य राजधानी के हर क्षेत्र में निर्बाध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली व्यवस्था में मजबूती से न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, बल्कि औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। बैठक में बताया गया कि दिल्ली में बिजली की अधिकतम मांग में लगातार इजाफा हो रहा है। वर्ष 2025 में राजधानी की पीक डिमांड करीब 8,400 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। औसतन हर साल 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसके पीछे बढ़ती आबादी, एयर कंडीशनर और अन्य विद्युत उपकरणों का बढ़ता उपयोग तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाया जाना प्रमुख कारण हैं। दिल्ली में अधिकतम बिजली मांग सामान्यत गर्मी के महीनों, खासकर जून और जुलाई में दर्ज की जाती है। बिजली तंत्र को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढाला जा रहा दीर्घकालिक आकलन के अनुसार, यदि मौजूदा रुझान जारी रहे तो वर्ष 2030 तक दिल्ली की अधिकतम बिजली मांग 11,500 से 12,000 मेगावाट तक पहुंच सकती है। वहीं 2040 तक इसके 19,000 से 20,000 मेगावाट तक जाने का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस बढ़ती मांग को चुनौती नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देख रही है और बिजली तंत्र को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढाला जा रहा है, ताकि वर्ष 2029 और उसके बाद भी आपूर्ति पर कोई दबाव न आए। फ्लाईओवरों के नीचे संरचनाएं स्थापित करने पर विचार बैठक में प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने इस योजना को और अधिक आकर्षक, सरल और नागरिकों के अनुकूल बनाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना दिल्ली के ऊर्जा भविष्य के लिए बेहद अहम है। मुख्यमंत्री को बताया गया कि कृषि भूमि पर सोलर पैनल लगाने की प्रक्रिया को सरल किया जा रहा है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने डिस्कॉम को निर्देश दिए कि वे फ्लाईओवरों के नीचे और अन्य उपयुक्त स्थानों पर बिजली वितरण से जुड़ी संरचनाएं स्थापित करने की संभावनाओं का गंभीरता से अध्ययन करें। उन्होंने कहा कि सीमित भूमि संसाधनों के बावजूद नवाचार के जरिए बिजली तंत्र को अधिक कुशल और प्रभावी बनाया जा सकता है।
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