मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना को सरकार की मंजूरी

Feb 12, 2026 08:25 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली सरकार ने खादी, हैंडलूम और कुटीर उद्योगों के कारीगरों के लिए 'मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना' की मंजूरी दी है। इस योजना के तहत 2025-26 में 3728 लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षित कारीगरों को आवश्यक टूलकिट दी जाएगी और उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहुंचाने का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना को सरकार की मंजूरी

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली सरकार ने खादी, हैंडलूम, कुटीर उद्योगों और असंगठित क्षेत्र से जुड़े हजारों कारीगरों के लिए ‘मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना’ को मंजूरी दी है। इस मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के कारीगर वर्षों से अपने हुनर से समाज को समृद्ध करते आए हैं। अब बदलते दौर में उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण और बाजार से सीधा जुड़ाव भी चाहिए। यह योजना यह सुनिश्चित करेगी कि वे आधुनिक कौशल और डिजिटल बाजार तक पहुंच के साथ इस नए दौर में न केवल टिकें, बल्कि तरक्की भी करें। मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कौशल विकास को राष्ट्र निर्माण का प्रमुख आधार बताया था।

केंद्रीय बजट 2026-27 में भी वित्त मंत्री ने कारीगरों को वैश्विक बाजार से जोड़ने, ब्रांडिंग, प्रशिक्षण और गुणवत्ता सुधार पर विशेष जोर दिया है। दिल्ली सरकार उसी सोच को आगे बढ़ाते हुए कौशल को सीधे सम्मानजनक आजीविका से जोड़ रही है। इस योजना को दिल्ली खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड (डीकेवीआईबी) के माध्यम से लागू किया जाएगा। इस योजना के तहत, वर्ष 2025-26 में 3728 लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए 8.95 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं, 2026-27 के लिए 57.50 करोड़ रुपये की अनुदान राशि प्रस्तावित किए जाने की संभावना है। योजना की शुरुआत ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत लगभग 18000 दर्जियों से की जाएगी और आगे चलकर अन्य पारंपरिक व्यवसायों तक इसे विस्तारित किया जाएगा। इसमें दर्जी, एम्ब्रॉयडर, ड्रेस मेकर, कुम्हार, बढ़ई, मोची, टोकरी और चटाई निर्माता, इत्र निर्माता, बांस उत्पाद निर्माता, नाई, माला बनाने वाले, धोबी, मछली जाल निर्माता, कालीन बुनकर सहित अनेक पारंपरिक व्यवसाय शामिल होंगे। प्रशिक्षण पूरा करने पर मिलेगा टूलकिट योजना के तहत चयनित शख्स को 12 दिन (96 घंटे) का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें दो दिन का उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) भी शामिल होगा। एक बैच में लगभग 35 से 45 लोग होंगे। प्रशिक्षण के बाद लाभार्थियों को पैर से चलने वाली सिलाई मशीन सहित आवश्यक टूलकिट उपलब्ध कराई जाएगी। प्रत्येक कारीगर की प्रोफाइल, फोटो और उत्पादों की जानकारी के साथ एक ई-कैटलॉग तैयार किया जाएगा, जिसे ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा। इससे उनके उत्पादों को राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी। आवेदन के लिए शर्तें - आवेदन करने वाले व्यक्ति की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए - एक परिवार से केवल एक ही सदस्य इस योजना का लाभ ले सकेगा - सरकारी नौकरी वाले या उनके परिवार के सदस्य पात्र नहीं होंगे - नामांकन के समय आधार आधारित पहचान और सत्यापन जरूरी होगा - प्रशिक्षण पूरा करने पर लाभार्थी को 4800 रुपये का भत्ता और भोजन के लिए 100 रुपये प्रतिदिन मिलेगा

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