
दिल्ली की सड़कों पर पार्किंग का संकट: ड्राइवर औसत रोज 20 मिनट गाड़ी खड़ी करने में गंवा रहे
-जामिया के शोध में सामने आए तथ्य, स्मार्ट पार्किंग सिस्टम से मिल सकता है समाधान
नई दिल्ली। अभिनव उपाध्याय राजधानी में गाड़ियों की पार्किंग के लिए औसतन एक ड्राइवर औसत 20 मिनट का समय गंवा रहे हैं। यही नहीं जगह तलाशने में समय और ईंधन दोनों व्यय होते हैं। यह स्थिति न केवल लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है, बल्कि शहर के ट्रैफिक जाम और प्रदूषण को भी बढ़ा रही है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सिविल इंजीनयरिंग विभाग के शोधकर्ताओं डॉ. अब्दुल अहद और डॉ. फरहान अहमद किदवई के शोध में 1200 से अधिक ड्राइवरों पर किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि 66 फीसद ड्राइवर पार्किंग आसानी से नहीं ढूंढ पाते, जबकि 73 फीसद ड्राइवर अब भी सड़क किनारे ही गाड़ियां खड़ी करते हैं।
यह प्रवृत्ति दिल्ली की सड़कों पर जाम की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। शोधार्थियों ने यह पाया कि दिल्ली जैसे महानगर में कारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन पार्किंग के लिए जमीन उतनी नहीं बढ़ पाई। हर साल नई गाड़ियों की बिक्री में इजाफा हो रहा है। बहुमंजिला और ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग प्रोजेक्ट्स बहुत कम हैं। लोग अब भी सबसे आसान विकल्प सड़क किनारे पार्किंग मानते हैं। कई जगह बनी पार्किंग का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता। अध्ययन की प्रमुख बातें शोधकर्ताओं ने तीन बड़े इलाकों कमला नगर मार्केट (उत्तर दिल्ली), भीकाजी कामा प्लेस (दक्षिण-पश्चिम दिल्ली) और नेहरू प्लेस (दक्षिण दिल्ली) में यह सर्वे किया। - 66 फीसदी ड्राइवरों को आसानी से पार्किंग नहीं मिलती। - 73 फीसदी लोग सड़क पर ही गाड़ी पार्क करते हैं। - 90 फीसदी लोग 250 मीटर से ज्यादा पैदल चलकर गाड़ी तक नहीं जाना चाहते। - पार्किंग सुरक्षा महिलाओं के लिए दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा है। -अगर जगह सुरक्षित और सुविधाजनक हो तो अधिकतर लोग 50 रुपये प्रति घंटे तक पार्किंग शुल्क देने को तैयार हैं, । शोधकर्ताओं ने इसके लिए दिया है प्री-ट्रिप पार्किंग मॉडल जामिया के शोधकर्ताओं डॉ. अब्दुल अहद और डॉ. फरहान अहमद किदवई का कहना है कि इस समस्या का समाधान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मॉडल से निकाला जा सकता है। उन्होंने दो-स्तरीय प्री-ट्रिप पार्किंग चॉइस मॉडल (पीसीएम) विकसित किया है। शोधकर्ताओं ने एक एआई-आधारित मॉडल बनाया है, जो ड्राइवर को सफर शुरू करने से पहले ही बताएगा कि उसकी मंजिल के पास कौन सी पार्किंग उपलब्ध है। ऐप या स्मार्ट डिस्प्ले पर दूरी, सुरक्षा और खर्च को देखते हुए सबसे अच्छा विकल्प सुझाया जाएगा। यह मॉडल दो चरण में काम करेगा। पहले चरण में ड्राइवर की मंजिल से 250 मीटर के दायरे में कौन सी पार्किंग उपलब्ध होगी, यह सिस्टम पहले से बता देगा। जबकि दूसरे चरण में पैदल दूरी,सुरक्षा,सुविधा,खर्च और पहुंच इन पांच मानकों पर उपलब्ध पार्किंग को रैंक किया जाएगा और इसके आधार पर एक मॉडल विकसित कर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। इसके बाद ड्राइवर को मोबाइल ऐप या स्मार्ट गाइडेंस सिस्टम पर सबसे उपयुक्त विकल्प सुझाया जा जाएगा। इससे क्या होगा लाभ -ड्राइवर को पहले से पता होगा कि कहां जगह खाली है। - सड़क पर बेवजह घूमने से ईंधन और समय बचेगा। - ट्रैफिक का दबाव कम होगा। - प्रदूषण का स्तर भी घटेगा। - महिलाएं सुरक्षित जगह पार्किंग आसानी से चुन सकेंगी। अंतरराष्ट्रीय उदाहरण सिंगापुर, लंदन और बार्सिलोना में स्मार्ट पार्किंग सिस्टम से ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों में कमी आई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि दिल्ली में भी यही मॉडल कारगर हो सकता है।

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