राजधानी में दिल्ली-देहरादून हाईवे पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगेगा
नंबर गेम 7.5 मेगावॉट होगी क्षमता 30 करोड़ रुपये आएगी लागत -दिल्ली की सीमा

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। राष्ट्रीय राजधानी की सीमा में दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 7.5 मेगावॉट सौर ऊर्जा का संयंत्र लगाया जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) के सहयोग से इसकी क्षमता निर्धारित की है। एनएचएआई के एक अधिकारी ने बताया कि संयंत्र लगाने के लिए निजी एजेंसी को जिम्मेदारी दी जाएगी। इस एजेंसी की तलाश के लिए आवेदन मांगने का प्रारूप तैयार करने पर काम किया जा रहा है। एनएचएआई 25 वर्ष के लिए एजेंसी से करार करेगी, उसके एवज में उससे किराया लिया जाएगा। इससे एनएचएआई को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। साथ ही यह पहल कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में सहायक होगी।
एलिवेटेड खंड पर लगेगा संयंत्र इस हाईवे का दिल्ली की सीमा में 6.5 किलोमीटर का एलिवेटेड खंड है। उस पर सूरज की रोशनी हर तरफ से आती है। इस खंड पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगेगा। सोलर पैनल एलिवेटेड हिस्से में साइड वॉल पर लगाए जाएंगे। एजेंसी को मिलेगा बिजली बेचने का अधिकार संयंत्र लगाने वाली निजी एजेंसी को बिजली बेचने का अधिकार दिया जाएगा। वह बिजली को ग्रिड में भेजेगा। एनएचएआई के अधिकारी ने बताया कि संयंत्र से उत्पन्न बिजली बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपीएल) को बेची जाएगी। इसके लिए उनसे करार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसे लेकर बीवाईपीएल के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बैठक हो चुकी है, जिसमें उन्होंने प्रति यूनिट चार से पांच रुपये का रेट प्रस्तावित किया है। जल्द इसे लेकर एक अंतिम बैठक होने वाली है। प्रति मेगावॉट चार करोड़ की लागत एनएचएआई के एक अधिकारी ने बताया कि सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने में प्रति मेगावॉट करीब चार करोड़ रुपये की लागत आती है। इस लिहाज से 7.5 मेगावॉट का संयंत्र लगाने में करीब 30 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस लागत की वसूली में लंबा समय लगेगा, इसे देखते हुए ही निजी एजेंसी से लंबी अवधि के करार पर विचार किया गया है।
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