गिरफ्तारी का कारण नहीं बताने पर आरोपी को जमानत
नई दिल्ली की रोहिणी जिला अदालत ने बवाना थाने में दर्ज एक आपराधिक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। अदालत ने आरोपी हिमांशु को जमानत देते हुए कहा कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया, जिससे आरोपी के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ।

नई दिल्ली। रोहिणी जिला अदालत ने बवाना थाने में दर्ज एक आपराधिक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने आरोपी हिमांशु को जमानत देते हुए स्पष्ट कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में बुनियादी कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया, जो कि सीधे तौर पर आरोपी के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वंदना की अदालत आरोपी हिमांशु की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोपी के खिलाफ पिछले वर्ष गैर-इरादतन हत्या के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि केस की न्यायिक फाइल में गिरफ्तारी के कारणों का कॉलम पूरी तरह खाली था।
अदालत ने इसे बेहद गंभीर मानते हुए जांच अधिकारी को मौका दिया कि यदि कहीं अलग से यह विवरण मौजूद हो तो पेश किया जाए, लेकिन वह इसमें असफल रहा। आरोपी के अधिवक्ता रवि दराल ने दलील दी कि आरोपी को गिरफ्तारी के समय कारण नहीं बताए गए। जांच पूरी हो चुकी है, आरोपी से कोई बरामदगी नहीं हुई है और आगे हिरासत में रखने की कोई जरूरत नहीं है।
लेखक के बारे में
Nikhil Pathakशॉर्ट बायो: निखिल पाठक एक प्रतिबद्ध और तथ्यपरक पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट मीडिया में 6.5 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ में कार्यालय संवाददाता के रूप में कोर्ट, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और स्पोर्ट्स बीट कवर कर रहे हैं। उनकी रिपोर्टिंग का फोकस न्याय, जवाबदेही और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर रहता है।
परिचय
निखिल पाठक नई दिल्ली में आधारित एक सक्रिय पत्रकार हैं, जो न्यायपालिका, पर्यावरणीय नियमन और खेल जगत से जुड़े विषयों पर गहन और संतुलित रिपोर्टिंग करते हैं। उन्होंने 1984 सिख विरोधी दंगा मामलों के कोर्ट ट्रायल व सजा पर फैसले, जमीन के बदले नौकरी घोटाला, आईआरसीटीसी घोटाला और अदालतों के आंकड़ों पर आधारित कई प्रमुख खबरों की कवरेज की है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में प्रदूषण, भूजल दोहन, जलाशयों के संरक्षण और पर्यावरणीय जवाबदेही से जुड़े मामलों पर भी उनकी विस्तृत रिपोर्टिंग रही है।
करियर का सफर
निखिल पाठक ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2019 में अमर उजाला के साथ की। अमर उजाला की चंडीगढ़ यूनिट में वह डेस्क पर कार्यरत थे, जहां उन्होंने खबरों के संपादन, पेज मेकिंग और डेस्क से जुड़े अन्य कार्यों की गहन समझ विकसित की। इसके बाद वर्ष 2022 में उन्होंने दैनिक जागरण में बतौर संवाददाता कार्यभार संभाला। दैनिक जागरण के पूर्वी दिल्ली कार्यालय में रहते हुए उन्होंने डीडीए, स्वास्थ्य, पीडब्ल्यूडी, आरडब्ल्यूए और धर्म-कर्म जैसी बीटों पर काम किया। इस दौरान उन्होंने जमीनी मुद्दों, नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े कई रोचक और प्रभावी समाचार लिखे।फरवरी 2025 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ जॉइन किया। एचटी मीडिया के साथ उनका एक वर्ष का अनुभव है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
निखिल ने एमए (जर्नलिज्म) तथा बैचलर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (बीजेएमसी) की पढ़ाई की है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और फील्ड अनुभव का संयोजन उन्हें कानूनी, पर्यावरणीय और खेल विषयों को तथ्यात्मक व सरल भाषा में प्रस्तुत करने में सक्षम बनाता है।
रिपोर्टिंग विजन
निखिल का मानना है कि कोर्ट और एनजीटी से जुड़े फैसले केवल कानूनी दस्तावेज नहीं होते, बल्कि वे सीधे समाज, शासन और आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी और पर्यावरणीय मुद्दों को पाठकों के लिए सरल, सटीक और विश्वसनीय रूप में प्रस्तुत करना है।
विशेषज्ञता
कोर्ट रिपोर्टिंग (ट्रायल, सजा, महत्वपूर्ण आदेश)
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)— प्रदूषण, भूजल दोहन, जलाशय संरक्षण
आंकड़ों पर आधारित न्यायिक रिपोर्टिंग
स्पोर्ट्स कवरेज
व्यक्तिगत रुचियां
संगीत, लेखन और बैडमिंटन
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