Delhi News: बिना मुहर के ‘समझौता’ दस्तावेज को कोर्ट ने खारिज किया, आरोपी बरी

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Delhi News: दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 12 साल पुराने लूट मामले में तीन भाइयों को बरी किया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बिना मुहर और हस्ताक्षर वाले समझौते के दस्तावेज को खारिज कर दिया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने उससे चाकू की धार पर हस्ताक्षर कराए और गाड़ी लूट ली।

Delhi News: बिना मुहर के ‘समझौता’ दस्तावेज को कोर्ट ने खारिज किया, आरोपी बरी

Delhi News: नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। कड़कड़डूमा कोर्ट ने 12 साल पुराने एक कथित लूट के मामले में तीन भाइयों को बरी कर दिया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय शर्मा-I की अदालत ने फैसले में पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश किए गए बिना मुहर और बिना हस्ताक्षर वाले ‘समझौते’ के संदिग्ध दस्तावेज को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस समझौते के आधार पर पुलिस केस को सही साबित करने का दावा कर रही थी, उस पर न तो थाने की कोई मुहर थी और न ही जांच अधिकारी के हस्ताक्षर, जिसके चलते आरोपी खेमचंद उर्फ बबलू, शौकीन पाल और देवेंद्र उर्फ पिंटू को बरी कर दिया गया。

मामले का इतिहास

यह मामला साल 2014 का है। शिकायतकर्ता दीपक के मुताबिक, उसने किश्त पर एक टाटा एस (छोटा हाथी) खरीदी थी, लेकिन बीमारी के कारण वह छह-सात किश्तें नहीं चुका पाया। उसका आरोप था कि 16 अगस्त 2014 को आरोपियों ने खुद को फाइनेंस कंपनी का आदमी बताकर उसकी गाड़ी रुकवाई और एक अंधेरी जगह पर ले जाकर चाकू की नोक पर खाली कागजों पर हस्ताक्षर कराए और वाहन लूट लिया। घटना के 15 दिन बाद जब असली फाइनेंस कंपनी का कर्मचारी किश्त मांगने आया, तब दीपक को पता चला कि कंपनी ने कोई गाड़ी जब्त ही नहीं की है, जिसके बाद मार्च 2015 में उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने इस केस में कोर्ट में एक कथित समझौते का कागज पेश कर दावा किया था कि यह समझौता दोनों पक्षों के बीच थाने में एक पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में हुआ था। अदालत ने कहा कि थाने में समझौता कराने का दावा तो किया गया, लेकिन उस कागज पर न तो संबंधित थाने की कोई आधिकारिक मुहर थी और न ही किसी जांच अधिकारी के हस्ताक्षर थे। यहां तक कि कोर्ट में उस पुलिसकर्मी की पहचान तक साबित नहीं हो सकी जिसने इसे तैयार कराया था। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि कानूनन ऐसे बिना प्रमाणित और संदिग्ध दस्तावेज को साक्ष्य नहीं माना जा सकता।

सामान्य प्रश्न

कड़कड़डूमा कोर्ट ने किस मामले में तीन भाइयों को बरी किया?
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 12 साल पुराने एक कथित लूट के मामले में तीन भाइयों को बरी किया।
Nikhil Pathak

लेखक के बारे में

Nikhil Pathak

शॉर्ट बायो: निखिल पाठक एक प्रतिबद्ध और तथ्यपरक पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट मीडिया में 6.5 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ में कार्यालय संवाददाता के रूप में कोर्ट, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और स्पोर्ट्स बीट कवर कर रहे हैं। उनकी रिपोर्टिंग का फोकस न्याय, जवाबदेही और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर रहता है।

परिचय
निखिल पाठक नई दिल्ली में आधारित एक सक्रिय पत्रकार हैं, जो न्यायपालिका, पर्यावरणीय नियमन और खेल जगत से जुड़े विषयों पर गहन और संतुलित रिपोर्टिंग करते हैं। उन्होंने 1984 सिख विरोधी दंगा मामलों के कोर्ट ट्रायल व सजा पर फैसले, जमीन के बदले नौकरी घोटाला, आईआरसीटीसी घोटाला और अदालतों के आंकड़ों पर आधारित कई प्रमुख खबरों की कवरेज की है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में प्रदूषण, भूजल दोहन, जलाशयों के संरक्षण और पर्यावरणीय जवाबदेही से जुड़े मामलों पर भी उनकी विस्तृत रिपोर्टिंग रही है।

करियर का सफर
निखिल पाठक ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2019 में अमर उजाला के साथ की। अमर उजाला की चंडीगढ़ यूनिट में वह डेस्क पर कार्यरत थे, जहां उन्होंने खबरों के संपादन, पेज मेकिंग और डेस्क से जुड़े अन्य कार्यों की गहन समझ विकसित की। इसके बाद वर्ष 2022 में उन्होंने दैनिक जागरण में बतौर संवाददाता कार्यभार संभाला। दैनिक जागरण के पूर्वी दिल्ली कार्यालय में रहते हुए उन्होंने डीडीए, स्वास्थ्य, पीडब्ल्यूडी, आरडब्ल्यूए और धर्म-कर्म जैसी बीटों पर काम किया। इस दौरान उन्होंने जमीनी मुद्दों, नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े कई रोचक और प्रभावी समाचार लिखे।फरवरी 2025 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ जॉइन किया। एचटी मीडिया के साथ उनका एक वर्ष का अनुभव है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
निखिल ने एमए (जर्नलिज्म) तथा बैचलर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (बीजेएमसी) की पढ़ाई की है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और फील्ड अनुभव का संयोजन उन्हें कानूनी, पर्यावरणीय और खेल विषयों को तथ्यात्मक व सरल भाषा में प्रस्तुत करने में सक्षम बनाता है।

रिपोर्टिंग विजन
निखिल का मानना है कि कोर्ट और एनजीटी से जुड़े फैसले केवल कानूनी दस्तावेज नहीं होते, बल्कि वे सीधे समाज, शासन और आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी और पर्यावरणीय मुद्दों को पाठकों के लिए सरल, सटीक और विश्वसनीय रूप में प्रस्तुत करना है।

विशेषज्ञता
कोर्ट रिपोर्टिंग (ट्रायल, सजा, महत्वपूर्ण आदेश)
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)— प्रदूषण, भूजल दोहन, जलाशय संरक्षण
आंकड़ों पर आधारित न्यायिक रिपोर्टिंग
स्पोर्ट्स कवरेज

व्यक्तिगत रुचियां
संगीत, लेखन और बैडमिंटन

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