संकट के बीच आत्मनिर्भरता तैयारी का एकमात्र रास्ता: रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मौजूदा अनिश्चितताओं के बीच आत्मनिर्भरता ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि वैश्विक स्थिति के कारण सप्लाई चेन में बदलाव हो रहे हैं। उन्होंने तकनीकी गतिशीलता और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर जोर दिया।

कोलकाता, एजेंसी। रक्षा मंत्री राजनाथ ने कहा कि मौजूदा अनिश्चितताओं के बीच तैयार रहने का एकमात्र रास्ता आत्मनिर्भरता है। शुक्रवार को कोलकाता में सागर संकल्प रक्षा एवं समुद्री संवाद कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद ये रक्षा मंत्री ने ये बात कही। रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान वैश्विक स्थिति के कारण सप्लाई चेन का पुनर्गठन हो रहा। नए समीकरण बन रहे हैं और समुद्री गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इससे सरकार का हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का संकल्प और मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि पुराने विचार, पुरानी वैश्विक व्यवस्था और पुरानी धारणाएं तेजी से बदल रही हैं।
इन चुनौतियों को समझना जरूरी है। मध्यपूर्व की मौजूदा स्थिति इसका प्रमुख उदाहरण है। उन्होंने कहा कि वहां जो कुछ भी हो रहा वह असामान्य है और भविष्य की दिशा के बारे में निश्चित टिप्पणी करना कठिन है।हॉर्मुज दुनिया के लिए अहमरक्षा मंत्री ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और परसिया की खाड़ी वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अशांति से सीधे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी आपूर्ति शृंखला में बाधा देखने को मिल रही जिसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्थिति असामान्य है और ये चिंता की बात है।तकनीक बन रही परिवर्तनकारीरक्षा मंत्री ने तकनीकी गतिशीलता” को दुनिया का एक अहम तत्व बताते हुए कहा कि तकनीक जीवन के हर क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन ला रही। रक्षा क्षेत्र में इसे और स्पष्ट देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में उन्नत और सटीक तकनीकों का उपयोग हो रहा है और सरकार भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने हेतु रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता** हासिल करना चाहती है।अप्रैल में रक्षा निर्यात का रिकॉर्डरक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार की कोशिशों से 2024-25 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया, जबकि रक्षा निर्यात लगभग 24,000 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर रहा। अप्रैल 2026 तक रक्षा निर्यात लगभग 29,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। सरकार ने वित्त वर्ष 2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा उपकरण निर्यात का लक्ष्य रखा है।
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