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दावा: हरियाली खो रहे दुनिया के महासागर

दावा: हरियाली खो रहे दुनिया के महासागर

संक्षेप:

पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि तापमान में वृद्धि के कारण महासागरों की हरियाली घट रही है। 2001 से 2023 तक के अध्ययन में पता चला है कि कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता में...

Oct 18, 2025 04:00 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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धरती की कार्बन डाईऑक्साइड सोखने की क्षमता कमजोर हुई पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया दावा धरती के गर्म होने की वजह से समुद्र के रंगों में बदलाव हो रहा 2001 से 2023 तक की गई स्टडी, नई दिल्ली, एजेंसी। तापमान में वृद्धि के कारण दुनिया के महासागर अपनी हरियाली खो रहे हैं। बीजिंग के डी लॉन्ग और पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के माइकल मैन सहित शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा किए गए अध्ययन में यह दावा किया गया है। अध्ययन में कहा गया है कि अगर यही स्थिति जारी रही तो पृथ्वी कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की अपनी क्षमता खो सकती है। महासागरों के रंग में बदलाव का कारण फाइटोप्लैंकटन की कमी है, ये छोटे समुद्री जीव हैं जो पृथ्वी की जैवमंडल की उत्पादकता के आधे हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं।

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दो दशकों के ट्रेंड का अध्ययन वैज्ञानिकों की टीम ने यह निष्कर्ष 2001 से 2023 तक निम्न और मध्य अक्षांशों के महासागरों में रोजाना क्लोरोफिल सांद्रता के आधार पर किया है। क्लोरोफिल एक हरा रंग का द्रव्य है जो फोटोसिंथेसिस के लिए जिम्मेदार है, यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पौधे, शैवाल और फाइटोप्लैंकटन सूर्य के प्रकाश, पानी और कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन और ग्लूकोज में बदलते हैं। यह पृथ्वी पर जीवन का एक मूलभूत आधार है। यह अध्ययन साइंस एडवांसेस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। ऐसे किया गया अध्ययन डीप-लर्निंग एल्गोरिदम का इस्तेमाल करके शोधकर्ताओं ने लेखकों ने समुद्रों के रंग में बदलाव का अंदाजा लगाने के लिए सैटेलाइट और मॉनिटरिंग जहाज़ों से डाटा इकट्ठा किया। उन्होंने स्टडी के दो दशक से ज्यादा समय में हरियाली में काफी कमी पाई । अध्ययन के अनुसार हर साल लगभग 0.35 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर हरियाली घट रही है। यह ट्रेंड तटीय इलाकों में दोगुना और नदी के मुहाने के पास चार गुना से भी ज्यादा था। शोधकर्ताओं ने इसे महासागर की पारिस्थितिक कार्यक्षमता में कमी से जोड़ते हैं, जिसमें कार्बन अवशोषण क्षमता में प्रति वर्ष 0.088% की कमी पाई गई। यह 32 मिलियन टन के बराबर है। शोधकर्ता डि लॉन्ग ने कहा कि सतह के फाइटोप्लांकटन की कार्बन सोखने की क्षमता में गिरावट का कार्बन साइकिल पर गहरा असर पड़ता है। समुद्र की ऊपर के हिस्से गर्म पेपर में कहा गया है कि सतह के पास समुद्र की ऊपरी हिस्सों के गर्म होने से गहराइयों में तापमान का अंतर बढ़ गया है, जिससे उन पोषक तत्वों के वर्टिकल ट्रांसपोर्ट में रुकावट आ रही है जिन पर फाइटोप्लांकटन निर्भर करते हैं। पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के सहयोगी लेखक माइकल मान ने कहा कि यह पहली स्टडी है जो पक्के तौर पर दिखाती है कि समुद्र की हरियाली में कमी आ रही है। यह नई रिसर्च पिछली कई स्टडीज के उलट है, जिनमें कहा गया था कि समुद्रों में एल्गल ब्लूम बढ़ रहे हैं। एल्गल ब्लूम एक ऐसी घटना है जिसमें समुद्र, झीलों या अन्य जलाशयों में शैवाल या फाइटोप्लैंकटन की संख्या में अचानक और तेजी से वृद्धि हो जाती है। यह जल की सतह पर हरे, नीले, लाल या भूरे रंग की परत के रूप में दिखाई दे सकता है।