फोन में सीधे टीवी चलाने की तकनीक का विरोध
नई दिल्ली में मोबाइल फोन पर बिना इंटरनेट और सिम कार्ड के लाइव टीवी देखने की तकनीक पर बहस हो रही है। इसे डायरेक्ट-टू-मोबाइल ब्रॉडकास्ट कहा जाता है। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने प्रसार भारती के परीक्षण पर आपत्ति जताई है, यह कहते हुए कि यह पारदर्शी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है और इससे 5जी सेवाओं पर प्रभाव पड़ेगा।
नई दिल्ली। मोबाइल फोन पर बिना इंटरनेट और सिम कार्ड के सीधे लाइव टीवी देखने की तकनीक को लेकर देश में बहस तेज हो गई है। इसे डायरेक्ट-टू-मोबाइल ब्रॉडकास्ट तकनीक कहा जाता है। हाल ही में सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती द्वारा कराए गए तकनीकी परीक्षण पर टेलीकॉम उद्योग संगठन सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं। एसोसिएशन का कहना है कि यह परीक्षण पारदर्शी और परामर्श आधारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। एसोसिएशन का कहना है कि यह पूरा परीक्षण टेलीकॉम ऑपरेटरों, डिवाइस निर्माताओं और अन्य प्रमुख हितधारकों की भागीदारी के बिना किया गया। संगठन के अनुसार, इस तकनीक का सीधा असर उन स्पेक्ट्रम बैंड्स पर पड़ता है, जिनका इस्तेमाल फिलहाल या भविष्य में 5जी और मोबाइल सेवाओं के लिए किया जाना है।
एक ऐसी ब्रॉडकास्ट तकनीक है, जिसके जरिए मोबाइल फोन पर सीधे टीवी चैनलों का प्रसारण किया जा सकता है। इसके लिए न तो मोबाइल डेटा की जरूरत होगी और न ही वाई-फाई या सेल्युलर नेटवर्क की। सरल शब्दों में कहें तो जैसे रेडियो बिना इंटरनेट के चलता है, उसी तरह इस तकनीक के जरिए मोबाइल फोन पर लाइव टीवी देखा जा सकेगा। सरकार और प्रसार भारती का मानना है कि यह तकनीक आपदा के समय, दूर-दराज इलाकों और सार्वजनिक सूचनाओं के प्रसारण के लिए बेहद उपयोगी हो सकती है। बड़े आयोजनों या आपात स्थितियों में लाखों लोगों तक एक साथ सूचना पहुंचाने में यह कारगर साबित हो सकती है। उपभोक्ता को क्या फायदा होगा 1. बिना इंटरनेट और सिम के टीवी 2. भीड़ या आपदा में भी निर्बाध सेवा 3. फोन की बैटरी अपेक्षाकृत कम खर्च होगी 4. डेटा खर्च में सीधी बचत 5. सस्ते या मुफ्त चैनल संभव 6. सस्ते मोबाइल रिचार्ज प्लान से मासिक खर्च पर नियंत्रण

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