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 एयरलाइंस में नौकरी के दिलाने के नाम पर ठगने वाले गिरोह का पर्दाफाश, नौ गिरफ्तार

एयरलाइंस में नौकरी के दिलाने के नाम पर ठगने वाले गिरोह का पर्दाफाश, नौ गिरफ्तार

संक्षेप: देशभर से 40 से ज्यादा लोगों को बना चुके हैं शिकार, टेलीकॉम कंपनी का एक कर्मचारी फर्जी आईडी पर सिम कार्ड उपलब्ध कराता था

Sat, 8 Nov 2025 07:56 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। दक्षिणी दिल्ली साइबर पुलिस ने एयरलाइंस में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने फर्जी जॉब कॉल सेंटर चलाने वाले मास्टरमाइंड समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें सात महिलाएं टेलीकॉलर हैं, जिन्हें प्रतिमाह 15 हजार रुपये वेतन पर रखा गया था। गिरफ्तार आरोपियों के पास से 22 मोबाइल फोन, एक डेस्कटॉप, 19 सिम कार्ड, आठ यूपीआई आईडी, क्यूआर कोड, वाई-फाई राउटर और ठगी में इस्तेमाल कॉलिंग स्क्रिप्ट बरामद हुई है। डीसीपी (साइबर) अंकित चौहान ने बताया कि एनसीआरपी पोर्टल पर एक पीड़ित ने 11 हजार रुपये की ठगी की शिकायत दी थी।

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पीड़ित ने ओएलएक्स पर इंडिगो एयरलाइंस में नौकरी का विज्ञापन देखकर संपर्क किया था। जांच में पता चला कि ठगी में इस्तेमाल मोबाइल नंबर कई राज्यों के साइबर मामलों में पहले से दर्ज हैं। पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर छापेमारी कर सरगना 38 वर्षीय विकास कुमार उर्फ विक्की को सुभाष नगर से पकड़ा। पूछताछ में खुलासा हुआ कि वह अपने साथियों सूरज और कपिल के साथ तिलक नगर के गणेश नगर इलाके में कॉल सेंटर चला रहा था। फर्जी सिम काउर् का इस्तेमाल करते थे पुलिस ने मौके से महिला टेलीकॉलर चरनजीत उर्फ चारु, शालिनी भारद्वाज, आरती कौर, पलवीन कौर, नंदिनी, पूजा गुप्ता और श्वेता उर्फ शिवानी सिंह को गिरफ्तार किया। सभी को वर्क इंडिया जैसे ऑनलाइन पोर्टल के जरिए हायर किया गया था। गिरोह को फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाला 31 वर्षीय बलजीत सिंह भी दबोचा गया, वह एक निजी टेलीकॉम कंपनी में कार्यरत है। आरोपी ग्राहकों की बायोमेट्रिक जानकारी का दुरुपयोग कर सिम कार्ड गिरोह को मुहैया कराता था। ऐसे फंसाते थे बेरोजगारों को पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह ओएलएक्स व अन्य जॉब पोर्टलों पर एयरलाइंस की भर्ती के फर्जी विज्ञापन डालता था। महिला टेलीकॉलर खुद को एचआर अधिकारी बताकर उम्मीदवारों से सुरक्षा शुल्क, यूनिफॉर्म और प्रशिक्षण फीस के नाम पर तीन चरणों में 2,500 से 15,000 रुपये तक वसूलती थीं। ठगी की रकम कम होने के कारण अधिकतर पीड़ित शिकायत दर्ज नहीं कराते थे, जिससे गिरोह पिछले एक साल से सक्रिय था। फिलहाल पुलिस ने 40 पीड़ितों की पहचान की है और मनी ट्रेल की जांच जारी है। आरोपी यूपीआई आईडी और क्यूआर कोड ऐसे नामों से बनाते थे, जिनमें एयरलाइंस या एविएशन से जुड़े शब्द शामिल हों ताकि पीड़ितों को भरोसा हो जाए। साइबर पुलिस की सलाह ऑनलाइन किसी भी जॉब ऑफर के नाम पर पैसा न भेजें। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या एचआर विभाग से ही सत्यापन करें। किसी संदिग्ध ऑफर की सूचना 1930 हेल्पलाइन या www.cybercrime.gov.in पर दें।