
साइबर ठगों ने एक साल में करीब 1,250 करोड़ रुपये का डाका डाला
दिल्ली में साइबर जालसाजी ने 'नए जमाने की डकैती' का रूप ले लिया है, जिसमें पिछले एक साल में 1,250 करोड़ रुपये की ठगी की गई है। हाल ही में ग्रेटर कैलाश में एक बुजुर्ग दंपति से 14.85 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई। पुलिस ने जागरूकता अभियान शुरू किया है, ताकि लोग सतर्क रहें और साइबर अपराध से बचें।
नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। राजधानी दिल्ली में साइबर जालसाजी अब 'नए जमाने की डकैती' का रूप ले चुकी है। साइबर अपराधियों ने पिछले एक साल के भीतर दिल्लीवासियों की गाढ़ी कमाई पर करीब 1,250 करोड़ रुपये का डाका डाला है। यदि देशव्यापी आंकड़ों पर गौर करें, तो यह ठगी 20,000 करोड़ रुपये के पार पहुंचने का अनुमान है, जो किसी छोटे राज्य के वार्षिक बजट के बराबर है। ग्रेटर कैलाश की घटना ने उड़ाए होश हाल ही में दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश में एक बुजुर्ग दंपति के साथ हुई 14.85 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी ने पुलिस और प्रशासन को सकते में डाल दिया है।
81 वर्षीय ओम तनेजा और उनकी पत्नी इंदिरा को 16 दिनों तक 'डिजिटल गिरफ्तारी' के नाम पर डराया गया। इस दौरान उन्होंने अपनी जीवन भर की बचत और म्यूचुअल फंड बेचकर करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक की रकम गंवा दी। गौरतलब है कि कानून में 'डिजिटल गिरफ्तारी' जैसा कोई प्रावधान नहीं है, फिर भी जालसाज इसका खौफ दिखाकर करोड़ों डकार रहे हैं। बढ़ता ग्राफ और रिकवरी पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, साइबर अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, लेकिन जांच एजेंसियों की सक्रियता से रिकवरी रेट में भी सुधार हुआ है। विवरण वर्ष 2024 वर्ष 2025 दिल्ली में कुल ठगी (अनुमानित) 1,100 करोड़ रुपये 1,250 करोड़ रुपये देशव्यापी ठगी का अनुमान - 20,000 करोड़ रुपये वसूली दर 10 फीसदी 24 फीसदी दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों से जुडे तार जांचकर्ताओं के मुताबिक, इन घोटालों के तार दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश कंबोडिया, वियतनाम और लाओस से जुड़े हैं। यहां चीनी एजेंटों द्वारा बड़े पैमाने पर स्कैम फार्म चलाए जा रहे हैं। सिम बॉक्स का खेल: अपराधी अवैध 'सिम बॉक्स' तकनीक का उपयोग करते हैं। इससे विदेश से की गई अंतरराष्ट्रीय कॉल पीड़ित के फोन पर भारतीय नंबर के रूप में दिखती है, जिससे पहचान छिपाना आसान हो जाता है। किराए के बैंक खाते: ठगी की रकम को खपाने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के बैंक खातों का उपयोग किया जाता है। ये लोग मामूली कमीशन के बदले अपने खाते अपराधियों को सौंप देते हैं, जिससे पैसों का ट्रेल ढूंढना मुश्किल हो जाता है। सांता की सीख और जागरुकता बढ़ते खतरों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने ‘सांता की सीख’ नामक एक विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है। इसके तहत क्यूआर कोड और संदिग्ध लिंक के प्रति लोगों को सचेत किया जा रहा है। साथ ही, बैंकों के फ्रंटलाइन कर्मचारियों के साथ समन्वय बैठकें की जा रही हैं ताकि संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर तुरंत रोक लगाई जा सके। सावधानी ही बचाव - पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती, ऐसी कॉल से बचें - तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें - www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करें - ठगी के 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट की जाती है, तो पैसे वापस मिलने की संभावना सबसे अधिक होती है

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