समाज की सामाजिक-आर्थिक संरचना को तोड़ रहा साइबर अपराध : कोर्ट

Jan 12, 2026 08:35 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली में राउज एवेन्यू अदालत ने ऑनलाइन ठगी के मामले में तीन आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि साइबर अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। आरोपियों ने 7721 सिम कार्डों का इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए किया। जांच के शुरुआती चरण में होने के कारण राहत देना उचित नहीं है।

समाज की सामाजिक-आर्थिक संरचना को तोड़ रहा साइबर अपराध : कोर्ट

नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। साइबर अपराध समाज की सामाजिक और आर्थिक संरचना को बुरी तरह नुकसान पहुंचा रहा है। यह टिप्पणी राउज एवेन्यू अदालत ने ऑनलाइन ठगी के मामले में तीन आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए की। अदालत ने कहा कि जब आरोप सीधे साइबर अपराध से जुड़े हों, तो ऐसे मामलों में आरोपियों को अग्रिम जमानत देने से अदालत को बचना चाहिए। विशेष न्यायाधीश राजेश मलिक की अदालत अनिक जैन, अमरदीप शर्मा और अरिहंत जैन की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन तीनों के खिलाफ सीबीआई ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और ठगी करने के आरोप में मामला दर्ज किया है।

इनके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की कई धाराओं में भी केस दर्ज है। कोर्ट ने कहा कि साइबर अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। अदालत ने यह भी कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है, पीड़ितों की सही संख्या सामने नहीं आई है और आगे चलकर आरोपियों से हिरासत में पूछताछ की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में इस स्तर पर उन्हें किसी तरह की राहत देना उचित नहीं है। खरीदे गए 7721 सिम कार्डों से हुई ठगी प्राथमिकी के मुताबिक, एक निजी कंपनी एम.एस लॉर्ड महावीर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने वर्ष 2024-25 के दौरान वोडाफोन आइडिया लिमिटेड से 7,721 सिम कार्ड हासिल किए। इन सिम कार्डों का इस्तेमाल लोगों को ठगने के लिए किया गया। आरोप है कि कॉल करने वाले खुद को ट्राई, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य सरकारी संस्थाओं का अधिकारी बताकर लोगों से धोखाधड़ी करते थे। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि सिम कार्ड हासिल करने के लिए कंपनी ने वोडाफोन को अंतिम उपयोगकर्ताओं की फर्जी सूची सौंपी। सिम कार्ड उन लोगों के नाम पर जारी कराए गए, जो कंपनी के कर्मचारी ही नहीं थे। इससे आरोपियों की साइबर अपराध में शामिल होने की मंशा साफ झलकती है। मामले की गंभीरता और अब तक जुटाए गए सबूतों को देखते हुए अदालत ने तीनों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

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