
चुनौती: बंगलुरु, हैदराबाद, एनसीआर डिजिटल अरेस्ट स्कैम के हॉटस्पॉट
संक्षेप: नई दिल्ली में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। आई4सी के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और हैदराबाद साइबर ठगी के प्रमुख हॉटस्पॉट बन गए हैं। इस साल भारतीयों ने सात हजार करोड़ रुपये गंवाए हैं, जिसमें विदेशी ठगों का भी हाथ है। पुलिस के लिए ये एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
नई दिल्ली, एजेंसी। देश के बड़े शहर साइबर अपराध का हॉटस्पॉट बन रहे। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली- एनसीआर), बेंगलुरु और हैदराबाद डिजिटल अरेस्ट कर लोगों से साइबर ठगी के तीन सबसे बड़े हॉटस्पॉट हैं। इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) के विश्लेषण में ये खुलासा हुआ है। आई4सी के अनुसार साइबर ठगी के सामने आए मामलों में से 65 फीसदी यहीं से रिपोर्ट किए गए हैं। इसमें बेंगलुरु की भागीदारी 26.8, हैदराबाद की 19.97 और दिल्ली- एनसीआर की भागीदारी 18.14 फीसदी है। साइबर अपराधाी लोगों वीडियो कॉल पर खुद को बड़ी जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर पैसे की ठगी कर रहे।

अपराध की ये नई दुनिया पुलिस के लिए चुनौती बनती जा रही है। संभावना है कि अगले माह होने वाली 60वें डीजीपी-आईजीपी की वार्षिक बैठक में इस मुद्दे पर मंथन होगा। सुरक्षित स्थानों से ठगी केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आने वाले आई4सी के आंकड़ों के अनुसार साइबर ठगी का धंधा सुरक्षित स्थानों से संचालित किया जा रहा। इस साल के शुरुआती पांच महीनों में भारतीयों ने सात हजार करोड़ रुपये गंवाए। इसमें सबसे ज्यादा पैसा चीन, म्यांमार, लाओस और थाईलैंड से संचालित साइबर ठगो ने वसूला। इन देशों में ठगी के लिए ठगों के गिरोह ने भारतीयों को लगा रखा है जिनसे जबरन ठगी कराई जा रही है। गांवों तक फैला नेटवर्क आईआईटी कानपुर की एक रिपोर्ट के अनुसार साइबर ठगी का नेटवर्क राज्यों और गांवों तक फैल चुका है। झारखंड के जमताड़ा के बाद मथुरा और हरियाणा का नूंह नया केंद्र बनकर उभरा है। नौ राज्यों के तीन दर्जन गांवों में इसका दायरा तेजी से फैला है। हरियाणा का मेवात, भिवानी, पलवल, उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और झारखंड के जमताड़ा और देवघर के आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़े पैमाने पर ठगी को अंजाम दिया जा रहा। विदेशी भी घात लगाए हैं साइबर अपराध के बढ़ते ग्राफ के बीच जानकारों का कहना है कि विदेशी भी इस अपराध में शामिल हो गए हैं। मलेशिया, चीन, पाकिस्तान और तुर्किए से साइबर ठग लोगों के खाते में सेंध लगा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि विदेशों में साइबर अपराध को अंजाम देने के लिए पूरा नेटवर्क काम कर रहा जो लोगों को फोन या लिंक के जरिए झांसे में लेने के बाद मोटी रकम पर हाथ साफ कर रहे हैं। पैसा बचाना चुनौती होगी आई4सी के अनुसार भारत में हर महीने औसतन एक हजार करोड़ रुपये की ठगी हो रही है। इस साल जनवरी में भारतीयों के 1192 करोड़ रुपये दक्षिण एशियाई देशों के गिरोहों ने लूटा। वहीं एशियाई देश के ठगों ने 951 करोड़ रुपये पर हाथ सफ किया। रिपोर्ट में आई4सी ने कहा है कि अगले साल तक भारतीय साइबर ठगों के जाल में फंसकर करीग 1.2 ट्रिलियन रुपये गंवा सकते हैं। पैसा बचाना बड़ी चुनौती होगी। सुधार पर काम जारी - 782 करोड़ रुपये के साइबर सिक्योरिटी प्रोजेक्ट पर काम - समन्वय पोर्टल से अपराधियों तक पहुंच आसान हुई है - पुलिस को जांच के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा - लोगों को जागरूक करने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर काम - ठगी से जुड़े दस लाख से अधिक सिम कार्ड बंद किए सावधानी ही बचाव - अनजान मेल- मैसेज पर आए लिंक पर क्लिक न करें - किसी अनजाने व्यक्ति का वीडियो कॉल नहीं उठाएं - खुद को कोई सरकारी अधिकारी बताए तो डरे नहीं - ऐसा फोन आता है तो तुरंत किसी जानकार को बताएं - किसी को बैंक खाते या निवेश की जानकारी नहीं दें यहां करें तत्काल शिकायत cybercrime.gov.in 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं

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