Hindi NewsNcr NewsDelhi NewsCTI Demands Caste Census and Taxpayer Data Collection from Government
करदाताओं की भी जाति आधारित गणना हो : सीटीआई

करदाताओं की भी जाति आधारित गणना हो : सीटीआई

संक्षेप:

संगठन का तर्क है कि सरकारी योजनाओं और नीतिगत लाभों में उसकी हिस्सेदारी भी उसी अनुपात में तय की जानी चाहिए।

Dec 13, 2025 04:09 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share Share
Follow Us on

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने केंद्र सरकार से जाति जनगणना के साथ-साथ करदाताओं की जाति का भी आंकड़ा एकत्र करने की मांग की है। इस संबंध में सरकार को भेजे पत्र में सीटीआई ने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था को चलाने में विभिन्न जातियों की कर के रूप में क्या भूमिका है, इसका स्पष्ट और पारदर्शी आकलन होना चाहिए। संगठन का तर्क है कि जिस वर्ग की कर भुगतान में जितनी भागीदारी है, सरकारी योजनाओं और नीतिगत लाभों में उसकी हिस्सेदारी भी उसी अनुपात में तय की जानी चाहिए। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल और महासचिव गुरमीत अरोड़ा ने कहा कि जातिगत सर्वे के साथ यह जानकारी भी जुटाई जाए कि किस जाति के लोग आयकर और जीएसटी के माध्यम से सरकार को कितना राजस्व देते हैं।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

उनका कहना है कि सरकार के पास टैक्स से जुड़ा समस्त डेटा पहले से उपलब्ध है, ऐसे में करदाताओं की जाति आधारित सूची तैयार करना व्यावहारिक है। सीटीआई ने सवाल उठाया कि क्या सबसे अधिक कर देने वाले वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर कोई विशेष नीति बनाई जाती है। संगठन का कहना है कि अधिक कर योगदान देने वाले वर्गों के लिए बीमा, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी योजनाएं भी होनी चाहिए। सीटीआई के अनुसार देश में करीब छह करोड़ और दिल्ली में लगभग 20 लाख व्यापारी हैं, जिन्हें सामाजिक समानता के सिद्धांत के अनुरूप उनका अधिकार मिलना चाहिए।