Hindi NewsNcr NewsDelhi NewsCourt Orders Private School to Cover Admission Costs for 35 Students After Illegal Fee Collection
संबद्धता रद्द होने पर भी फीस लेने वाले स्कूल दें दाखिले का खर्च

संबद्धता रद्द होने पर भी फीस लेने वाले स्कूल दें दाखिले का खर्च

संक्षेप:

दिल्ली हाईकोर्ट ने 35 छात्रों के हक में फैसला सुनाते हुए निजी स्कूल को निर्देश दिया है कि वह इन छात्रों के दूसरे स्कूल में दाखिले का खर्च उठाए। स्कूल ने गैरकानूनी तरीके से महीनों तक फीस वसूली थी। कोर्ट ने छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सीबीएसई की वेबसाइट पर उनकी सूची जारी करने का भी आदेश दिया है।

Jan 17, 2026 08:58 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share Share
Follow Us on

नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने 35 छात्रों के हक में फैसला सुनाते हुए कहा कि इन बच्चों से गैरकानूनी तरीके से महीनों फीस वसूलने वाले निजी स्कूल को अब इनके दूसरे स्कूल में दाखिले का खर्च उठाना होगा। कोर्ट ने निजी स्कूल को निर्देश दिया है कि वह हर छात्र के दाखिले की रसीद के हिसाब से रकम का भुगतान करे। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि ग्याहरवीं कक्षा के इन छात्रों के भविष्य को किसी हाल में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। इन्हें न केवल दूसरे स्कूल में दाखिला दिया जाए, बल्कि केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) इन छात्रों की अपनी वेबसाइट पर सूची जारी करे।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

इससे इन छात्रों के भविष्य के दो साल खराब होने से बचाया जाना जरूरी है। यह मामला पश्चिमी विहार स्थित रिचमंड ग्लोबल स्कूल से जुड़ा है। सीबीएसई ने इस स्कूल की कक्षा नवीं से लेकर 12वीं कक्षा तक की संबद्धता को अप्रैल 2025 में रद्द कर दिया था। स्कूल ने इसकी जानकारी छात्रों को नहीं दी। दिसंबर 2025 तक स्कूल ने सभी छात्रों से फीस वसूली। यहां तक की दसवीं व बारहवीं के छात्रों से सीबीएसई को जमा की जाने वाली परीक्षा फीस भी ली गई। दिसंबर के आखिरी सप्ताह में छात्रों को सीबीएसई की संबद्धता रद्द होने की जानकारी दी गई। इसके बाद छात्रों ने हाईकोर्ट का रुख किया। गैरकानूनी तरीके से वसूली गई फीस लौटाने पर होगी सुनवाई पीठ ने गैर कानूनी तरीके से 9 महीने तक छात्रों के अभिभावकों से फीस वसूलने वाले निजी स्कूल को कहा है कि फीस वापस करने के मुद्दे पर अगली तारीख पर विचार किया जाएगा। पीठ ने साथ ही इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 23 जनवरी की तारीख तय की है। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली सरकार की तरफ से कहा गया है कि सत्र के अंतिम चरण में वह इन छात्रों को पश्चिमी जिले के सरकारी स्कूलों में दाखिला देने को तैयार हैं। बारहवीं कक्षा के छात्रों को बोर्ड परीक्षा बैठने की मिली अनुमति दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर पहले ही इस स्कूल के बाहरवीं कक्षा के छात्रों को बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति मिल चुकी है। मुद्दा ग्याहरवीं कक्षा के छात्रों का इस समय भविष्य दांव पर लगने को लेकर था। सीबीएसई में ग्याहरवीं के पंजीकरण के आधार पर ही बारहवीं कक्षा में बोर्ड परीक्षा का निर्धारण होता है। यदि ये छात्र ग्याहरवीं कक्षा की परीक्षा नहीं दे पाते तो अगले सत्र में वह बारहवीं कक्षा में नहीं पढ़ पाते। इस आदेश से अप्रत्यक्ष रुप से 75 छात्रों को लाभ मिला है। उच्च न्यायालय ने मई 2025 में लगा दी थी रोक दिल्ली उच्च न्यायालय ने 15 मई 2025 को निजी स्कूल को निर्देश दिया था कि सीबीएसई ने संबद्धता रद्द कर दी है। उच्च न्यायालय ने स्कूल में ग्याहरवीं व बारहवीं कक्षा के संचालन को पूरी तरह बंद करने के निर्देश दिए थे। साथ ही नया दाखिला नहीं लेने को कहा था। लेकिन स्कूल ने उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन किया। जिसकी वजह से यह परिस्थिति उत्पन्न हुई।