बच्चों को सुरक्षित माहौल देने में विफल हो रहा समाज : कोर्ट

Nikhil Pathak हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली में अदालत ने 11 साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न के दोषी को 5 साल की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि आज बच्चों की सुरक्षा खतरे में है। मामले में दोषी को 10 हजार रुपये जुर्माना और पीड़िता के पुनर्वास के लिए 3 लाख रुपये मुआवजा भी दिया गया।

बच्चों को सुरक्षित माहौल देने में विफल हो रहा समाज : कोर्ट

नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। राजधानी में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अदालत ने गहरी चिंता जाहिर की है। तीस हजारी अदालत ने 11 साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न के दोषी को सजा सुनाते हुए कहा कि आज हालात ऐसे हो गए हैं कि बच्चे घर के बाहर सुरक्षित नहीं हैं। यह दर्शाता है कि हम एक समाज के रूप में अपनी आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित माहौल देने में पूरी तरह विफल हो रहे हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबीता पुनिया की अदालत ने मामले में पॉक्सो अधिनियम की धारा 10 और बीएनएस की धारा 74 के तहत दोषी ठहराए गए धर्मेंद्र को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने कहा कि यह केवल एक बच्ची के खिलाफ अपराध नहीं, बल्कि बचपन की गरिमा और समाज के मूल्यों पर गंभीर हमला है। अदालत ने जांच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर पूजा चंदेल द्वारा आरोपपत्र दाखिल किए जाने के महज 14 दिन के भीतर फैसला सुनाया है। पीड़िता के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है。

अपराध छिपाने के लिए मदद करने का दिया तर्क

घटना तीन अप्रैल 2026 की रात निहाल विहार इलाके की है। पीड़िता अपने भाई और सहेली के साथ घर के बाहर खेल रही थी। तभी दोषी ने उसके साथ ज्यादती की। बच्ची के शोर मचाने पर वह भाग गया। कानूनी लड़ाई में घर के बाहर लगे कैमरे की फुटेज निर्णायक साबित हुई। सुनवाई के दौरान दोषी के वकील ने दलील दी कि बारिश के कारण जमीन गीली होने की वजह से बच्ची फिसल रही थी और उसका मुवक्किल उसे गिरने से बचा रहा था। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने गौर किया कि फुटेज में बच्ची के फिसलने के कोई संकेत नहीं थे।

दोषी की अपील खारिज

सुनवाई के दौरान दोषी ने खुद को पहली बार अपराध करने वाला बताते हुए अपनी कम उम्र, पत्नी और दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी का हवाला देकर सजा में नरमी की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि अपराध करते समय उसे अपने परिवार की जिम्मेदारियों का एहसास होना चाहिए था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अदालत ने दोषी को कितनी सजा सुनाई?
अदालत ने दोषी को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
Nikhil Pathak

लेखक के बारे में

Nikhil Pathak

शॉर्ट बायो: निखिल पाठक एक प्रतिबद्ध और तथ्यपरक पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट मीडिया में 6.5 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ में कार्यालय संवाददाता के रूप में कोर्ट, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और स्पोर्ट्स बीट कवर कर रहे हैं। उनकी रिपोर्टिंग का फोकस न्याय, जवाबदेही और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर रहता है।

परिचय
निखिल पाठक नई दिल्ली में आधारित एक सक्रिय पत्रकार हैं, जो न्यायपालिका, पर्यावरणीय नियमन और खेल जगत से जुड़े विषयों पर गहन और संतुलित रिपोर्टिंग करते हैं। उन्होंने 1984 सिख विरोधी दंगा मामलों के कोर्ट ट्रायल व सजा पर फैसले, जमीन के बदले नौकरी घोटाला, आईआरसीटीसी घोटाला और अदालतों के आंकड़ों पर आधारित कई प्रमुख खबरों की कवरेज की है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में प्रदूषण, भूजल दोहन, जलाशयों के संरक्षण और पर्यावरणीय जवाबदेही से जुड़े मामलों पर भी उनकी विस्तृत रिपोर्टिंग रही है।

करियर का सफर
निखिल पाठक ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2019 में अमर उजाला के साथ की। अमर उजाला की चंडीगढ़ यूनिट में वह डेस्क पर कार्यरत थे, जहां उन्होंने खबरों के संपादन, पेज मेकिंग और डेस्क से जुड़े अन्य कार्यों की गहन समझ विकसित की। इसके बाद वर्ष 2022 में उन्होंने दैनिक जागरण में बतौर संवाददाता कार्यभार संभाला। दैनिक जागरण के पूर्वी दिल्ली कार्यालय में रहते हुए उन्होंने डीडीए, स्वास्थ्य, पीडब्ल्यूडी, आरडब्ल्यूए और धर्म-कर्म जैसी बीटों पर काम किया। इस दौरान उन्होंने जमीनी मुद्दों, नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े कई रोचक और प्रभावी समाचार लिखे।फरवरी 2025 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ जॉइन किया। एचटी मीडिया के साथ उनका एक वर्ष का अनुभव है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
निखिल ने एमए (जर्नलिज्म) तथा बैचलर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (बीजेएमसी) की पढ़ाई की है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और फील्ड अनुभव का संयोजन उन्हें कानूनी, पर्यावरणीय और खेल विषयों को तथ्यात्मक व सरल भाषा में प्रस्तुत करने में सक्षम बनाता है।

रिपोर्टिंग विजन
निखिल का मानना है कि कोर्ट और एनजीटी से जुड़े फैसले केवल कानूनी दस्तावेज नहीं होते, बल्कि वे सीधे समाज, शासन और आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी और पर्यावरणीय मुद्दों को पाठकों के लिए सरल, सटीक और विश्वसनीय रूप में प्रस्तुत करना है।

विशेषज्ञता
कोर्ट रिपोर्टिंग (ट्रायल, सजा, महत्वपूर्ण आदेश)
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)— प्रदूषण, भूजल दोहन, जलाशय संरक्षण
आंकड़ों पर आधारित न्यायिक रिपोर्टिंग
स्पोर्ट्स कवरेज

व्यक्तिगत रुचियां
संगीत, लेखन और बैडमिंटन

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