
निगम की अनुमति के बिना अवैध निर्माण करने वाला दोषी करार
अदालत ने कहा, जांच में निर्माण जारी रखने की जानकारी और सहमति मालिक के पास होने के सबूत मिले
नई दिल्ली, का.सं.। राजधानी में अनियंत्रित अवैध निर्माणों पर सख्त रुख अपनाते हुए साकेत कोर्ट ने देवली क्षेत्र में चौथी मंजिल का निर्माण करने वाले कन्हैया लाल को दोषी करार दिया है। अदालत ने कहा कि दिल्ली में बिना अनुमति बहुमंजिला इमारतें खड़ी करना कानून की सीमा का उल्लंघन है और आदेशों की अवहेलना किसी भी रूप में स्वीकार नहीं की जा सकती। न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष कुमार मीना ने कहा कि दिल्ली नगर निगम को अवैध निर्माण रोकने के लिए विशेष अधिकार प्राप्त हैं और उन्हें प्रभावी रूप से लागू किया जाना चाहिए। अभियोजन पक्ष ने बताया कि दुर्गा विहार स्थित मकान में आरोपी ने निगम की अनुमति और नक्शा पास कराए बिना निर्माण शुरू किया था।

मार्च 2020 में निरीक्षण के दौरान नगर निगम अधिकारियों ने इसे पकड़ लिया। निगम ने कारण बताओ नोटिस जारी किया और बाद में ध्वस्तीकरण आदेश भी दिया, लेकिन नोटिस लेने से मना करने पर इसे संपत्ति पर चिपकाया गया। अदालत ने नोटिस लेने से इनकार को कानून से बचने का तरीका नहीं माना। निर्माण जारी रखने की जानकारी और सहमति मालिक के पास होने के सबूत मिले। निरीक्षण अधिकारी की गवाही, साइट प्लान और दस्तावेजों को विश्वसनीय मानते हुए अदालत ने आरोपी कन्हैया लाल को दोषी ठहराया।

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