Hindi NewsNcr NewsDelhi NewsCost of Permanent Lok Adalat Case Settlement in UP and Bihar 200 Times Higher than Delhi NALSA Report
स्थाई लोक अदालत: दिल्ली की तुलना में बिहार-यूपी में प्रति मामले निपटान पर 200 गुना से अधिक खर्च

स्थाई लोक अदालत: दिल्ली की तुलना में बिहार-यूपी में प्रति मामले निपटान पर 200 गुना से अधिक खर्च

संक्षेप:

प्रभात कुमार नई दिल्ली। दिल्ली की तुलना में उत्तर प्रदेश और बिहार के स्थाई लोक

Dec 23, 2025 07:25 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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प्रभात कुमार नई दिल्ली। दिल्ली की तुलना में उत्तर प्रदेश और बिहार के स्थाई लोक अदालत (पीएलए) में प्रति मामले का खर्च करीब दो सौ गुना अधिक है। इसका खुलासा, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की एक रिपोर्ट में हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली स्थित स्थाई लोक अदालत में प्रति मामले निपटान का खर्च औसतन महज 500 रुपये और हरियाणा में 766 रुपये आता है। जबकि इसके विपरीत उत्तर प्रदेश में प्रति मामले में निपटान का खर्च एक लाख 10,895 रुपये और बिहार में एक लाख 6 हजार रुपये खर्च होता है। हालांकि प्रति मामले निपटान का खर्च का राष्ट्रीय औसत 2650 रुपये हैं।

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली की तुलना में यूपी और बिहार में प्रति मामले खर्च 200 गुना से अधिक खर्च आता है ,जबकि हरियाणा की तुलना में इन दोनों राज्यों में 140 गुना अधिक खर्च आता है। इस रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि खर्च को तर्कसंगत बनाने और बेहतर दक्षता और परिणामों को सुनिश्चित करने के लिए संसाधनों को अनुकूलित करने पर केंद्रित होनी चाहिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि स्थाई लोक अदालत की हर बैठक में औसत खर्च 17 हजार रुपये आ रहा है। इस रिपोर्ट पीएलए में रिक्तियों के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा गया है कि बिहार, पंजाब, तमिलनाडु, राजस्थान, ओडिशा जैसे राज्यों में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति में काफी कमी है, जिससे संस्थागत कामकाज प्रभावित हो रहा है। इसके लिए एक मजबूत नियुक्ति और निगरानी प्रणाली लागू करने की वकालत की गई है ताकि स्थायी लोक अदालतों की दक्षता और पहुंच में काफी सुधार किया जा सकता है। स्थाई लोक अदालत में अध्यक्ष और सदस्यों के बड़े पैमाने पर पद खादी राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की रिपोर्ट के मुताबिक 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थाई लोक अदालत कार्यरत है। जबकि 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इन्हें अभी स्थापित किया जाना बाकी है। देशभर के ‌पीएलए में 289 सेवारत अध्यक्ष और 593 सदस्य हैं, जबकि 98 अध्यक्ष का पद और 181 सदस्य का पद खाली हैं। मुकदमा निपटान के दर में 155 फीसदी का उछाल रिपोर्ट के मुताबिक देशभर के स्थाई लोक अदालत में 2016-17 में 93,000 मामले का निपटारा किया है, जबकि 2024-25 में यह बढ़कर 2.37 लाख से अधिक हो गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016-17 की तुलना में 2024-25 में 155 फीसदी अधिक मामले का निपटारा किया गया। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी और अगस्त 2025 के बीच, देश भर में पी‌एलए ने 22,791 बैठकें कीं और इस दौरान एक लाख 78 हजार प्राप्त मामलों में से 1 लाख 48 हजार मामलों का निपटारा कर दिया। 1.61 करोड़ लोगों को दी गई निशुल्क विधिक सहायता नालसा के मुताबिक 2015 से 2025 तक देशभर में 1.61 करोड़ से अधिक लोगों को कानूनी सहायता मिली दी गई। कानूनी सहायता मिलने की वजह से पीड़ितों को ₹2,354 करोड़ मुआवजे के तौर पर मिले। नालसा ने कहा है कि इस अवधि में 40 करोड़ से अधिक मामले में राष्ट्रीय लोक अदालतों और 13,11,345 मामले स्थाई लोक अदालत में निपटारा किया गया।

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