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एम्स में एक दशक में तीन गुना बढ़े कॉस्मेटिक सर्जरी के मामले

cosmetic surgery

चेहरे को खूबसूरत बनाने और नाक-नक्श तीखे करने के लिए प्लास्टिक सर्जरी कराने का चलन अब तेजी से बढ़ता जा रहा है। एम्स जैसे प्रमुख चिकित्सा संस्थान में पिछले एक दशक में इस तरह के मामले तीन गुना बढ़ गए हैं। हाल ही में एम्स में कॉस्मेटिक सर्जरी पर एक दिवसीय केडेवेरिक वर्कशॉप का आयोजन भी किया गया, जिसमें पार्थिव शरीर का इस्तेमाल कर प्रशिक्षण दिया जाता है। देश में पहली बार किसी सरकारी चिकित्सा संस्थान में इस तरह की वर्कशॉप आयोजित की गई। 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इस वर्कशॉप में मोरक्को और ताइवान के डॉक्टरों के साथ देशभर से निजी और सरकारी अस्पतालों के कई प्लास्टिक सर्जन और डर्मेटोलॉजिस्ट ने भाग लिया। एम्स में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष सिंघल ने बताया कि वर्कशॉप का उद्देश्य चेहरे की विभिन्न संरचनाओं और रक्त नलिकाओं से उनके संबंध का अध्ययन करना था।

एम्स ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉ. राजेश मल्होत्रा के मुताबिक पिछले एक दशक में उन लोगों के बीच कॉस्मेटिक सर्जरी जैसे इलाज के तरीकों की मांग बढ़ रही है जो संसाधन संपन्न हैं और खूबसूरत दिखना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि लोग आंखों के नीचे के काले घेरों को समाप्त करने के लिए फिलर के इंजेक्शन लेते हैं, झाइयों को हटाने के लिए बोटोक्स के इंजेक्शन लगवाते हैं, होठ और नाक की सर्जरी कराते हैं। युवा खूबसूरत दिखने के लिए इन चीजों को लेकर अधिक जागरुक हैं।

डॉ. मल्होत्रा ने कहा कि ये ज्यादातर क्लीनिकल प्रक्रियाएं हैं। इनका मकसद केवल कॉस्मेटिक होता है, लेकिन जरूरी है कि इंजेक्शन सही तरीके से लगाए जाएं जिससे कोई साइड इफेक्ट नहीं हो और नसों तथा रक्त नलिकाओं को नुकसान नहीं हो।

उन्होंने बताया कि उदाहरण के लिए आंखों के नीचे के काले घेरे समाप्त करने के लिए फिलर इंजेक्ट करते समय अगर गलत रक्त नलिकाओं पर जोर पड़ गया तो आंखों की रक्त नलिकाओं को नुकसान हो सकता है और कुछ मामलों में तो दृष्टि भी जाने का डर होता है।

डॉ. सिंघल ने कहा कि पिछले दिनों हुई इस वर्कशॉप में 'प्लास्टिनेशन' तकनीक पर बात हुई जिसमें रक्त नलिकाओं को रंगीन डाई के साथ इंजेक्ट किया जाता है ताकि चीर-फाड़ के दौरान वे साफ-साफ दिखाई दें। इसके बाद स्किन के नीचे फिलर इंजेक्ट किए जाते हैं।

एम्स के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. राजा तिवारी ने कहा कि पिछले एक दशक में एम्स में कॉस्मेटिक इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या में तीन गुना इजाफा हुआ है।

इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जरी (आईएसएपीएस) द्वारा कराये गये एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में भारत का स्थान चौथा है और 2015 में देश में 9,35,487 कॉस्मेटिक प्रक्रियाएं या सर्जरी की गईं। इस लिहाज से पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर क्रमश: अमेरिका, ब्राजील और दक्षिण कोरिया के नाम हैं।

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  • Web Title:cosmetic surgery Cases three times increase in a decade at AIIMS