बंगाल : ‘अमान्य मतदाता’ के लिए अवैध फार्म के वितरण पर विवाद
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया समाप्त होने से पहले अमान्य मतदाताओं के लिए अनधिकृत फॉर्म बांटने का विवाद खड़ा हो गया है। निर्वाचन आयोग ने जिला अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। राज्य में 32 लाख अमान्य मतदाता हैं, और बिना दस्तावेजों के उन्हें अंतिम सूची में शामिल करने पर सवाल उठ रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के समाप्त होने से पहले अनमैप्ड वोटर्स (अमान्य मतदाताओं) के लिए कथित तौर पर अनधिकृत फॉर्म के वितरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ऐसी खबरें हैं कि अनधिकृत फॉर्म बांटे जा रहे हैं जिनमें उन ‘अमान्य मतदाताओं’ को शामिल किया जा रहा है जो इस प्रक्रिया के दौरान जरूरी दस्तावेज जमा करने में विफल रहे हैं। यह प्रक्रिया समाप्त होने से कुछ ही दिन पहले मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना के कुछ हिस्सों में इस तरह के फार्म बांटे जाने के आरोपों के बाद निर्वाचन आयोग ने जिला अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया है कि निर्वाचन आयोग द्वारा ऐसा कोई फार्म जारी नहीं किया गया।
मतदाता सूची के एसआईआर के तहत सुनवाई की प्रक्रिया शनिवार को समाप्त होने वाली है, जिसके बाद मतदाता सूची में शामिल होने के लिए कोई भी नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा कि आयोग ने ऐसा कोई फार्म जारी नहीं किया है। हमने जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) से रिपोर्ट मांगी है। अवैध फार्म में घोषणा पत्र देने को कहा गया बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) के एक वर्ग ने दावा किया कि अनधिकृत प्रपत्र में तथाकथित ‘अमान्य मतदाताओं’ को एक घोषणा प्रस्तुत करने की जरूरत होती है जिसमें कहा गया कि न तो उनके पास और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य के पास 2002 का दस्तावेज या निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित 13 दस्तावेजों में से कोई भी दस्तावेज है, लेकिन वे लंबे समय से उस क्षेत्र में रह रहे हैं। राज्य में 32 लाख हैं अमान्य मतदाता अधिकारी ने बताया कि राज्य में वर्तमान में ‘अमान्य मतदाताओं’ की संख्या लगभग 32 लाख है। सवाल उठ रहे हैं कि बिना दस्तावेजी सबूत के, सिर्फ पांच व्यक्तियों के प्रमाणीकरण के आधार पर ऐसे मतदाताओं को अंतिम समय में अंतिम सूची में कैसे शामिल किया जा सकता है। आयोग ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया जब यह मामला अग्रवाल के संज्ञान में लाया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया था। निर्वाचन आयोग के सूत्रों ने बताया कि इस तरह के प्रपत्र के वितरण के संबंध में जानकारी जादवपुर और हरिहरपाड़ा से प्राप्त हुई थी। उन क्षेत्रों के बीएलओ ने आरोप लगाया है कि ये प्रपत्र चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) द्वारा उपलब्ध कराए गए थे।
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