बांग्लादेश में श्रीमद् भगवद् गीता के पाठ पर रोक से विवाद

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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- राजशाही-1 के सांसद प्रोफेसर मुजीबुर रहमान पाठ पर रोक लगाने का निर्देश दिया था

बांग्लादेश में श्रीमद् भगवद् गीता के पाठ पर रोक से विवाद

ढाका, एजेंसी।बांग्लादेश के 56वें ​​स्वतंत्रता दिवस पर 26 मार्च को तनोर उपजिला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान श्रीमद् भगवद् गीता के पाठ को रोकने का कथित निर्देश दिया गया था। इसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है।राजशाही-1 (तनोर-गोदागरी) के सांसद प्रोफेसर मुजीबुर रहमान और बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नायब-ए-अमीर द्वारा श्रीमद् भगवद् गीता के पाठ को प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया था। इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की गई है और जगह-जगह इसे लेकर विरोध किया जा रहा है। इस मामले को लेकर बांग्लादेश राष्ट्रीय हिंदू ग्रैंड अलायंस (केंद्रीय कार्यकारी समिति) ने आक्रोश जताते हुए कड़ी निंदा की। पूरे बांग्लादेश में स्वतंत्रता दिवस और राष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में होने वाले राजकीय कार्यक्रमों में ऐसे आयोजनों की शुरुआत धार्मिक ग्रंथों के पाठ से करने की परंपरा है।

इस दिन कुरान के पाठ के साथ-साथ श्रीमद् भगवद् गीता के अंशों का पाठ भी पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। शुक्रवार सुबह मीडिया को भेजे गए एक बयान में बांग्लादेश राष्ट्रीय हिंदू ग्रैंड अलायंस के महासचिव डॉ. मृत्युंजय कुमार रॉय ने सवाल उठाया कि एक महत्वपूर्ण राजकीय कार्यक्रम में ऐसा निर्देश कैसे दिया जा सकता है। उन्होंने राज्य के अधिकारियों से इस पर स्पष्टीकरण मांगा है। बताया गया कि यह निर्देश तनोर के उपजिला निर्बाही अधिकारी (यूएनओ) को दिया गया था। हालांकि यूएनओ नाइमा खान के प्रयासों से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें गीता का पाठ भी शामिल था। संगठन ने यूएनओ नाइमा खान के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

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