खेल : आशीष के अयोग्य घोषित होने से रेफरी के फैसलों पर विवाद
राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप में ओलंपियन आशीष चौधरी को उनके पहले मुकाबले में अयोग्य घोषित किया गया। रेफरी के निर्णय पर सवाल उठे हैं, जिसके बाद भारतीय मुक्केबाजी महासंघ ने मामले की जांच शुरू की। आशीष का कहना है कि यह जानबूझकर नहीं हुआ। पूर्व विश्व चैंपियन स्वीटी बूरा ने भी रेफरी के फैसले पर सवाल उठाए।

राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप ग्रेटर नोएडा, एजेंसी। ओलंपियन आशीष चौधरी को उनके शुरुआती मुकाबले में अयोग्य घोषित करने के बाद मुक्केबाजी चैंपियनशिप में रेफरी के फैसलों पर सवाल खड़े हो गए हैं। भारतीय मुक्केबाजी महासंघ ( बीएफआई) ने मामले की समीक्षा के आदेश दिए हैं। पुरुष लाइटवेट वर्ग (80 किग्रा) में मुकाबला कर रहे 2019 एशियाई चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता आशीष को सोमवार को मुकाबले के दो मिनट से भी कम समय में अयोग्य ठहरा दिया गया। फैसला इस आधार पर लिया गया कि उन्होंने हरियाणा के रूपेश से जानबूझकर सिर टकराया, जिससे रूपेश को चोट लग गई और खून बहने लगा।
रेफरी ने शुरुआत में इसे अनजाने में हुई घटना करार देते हुए रूपेश को स्टैंडिंग काउंट दिया। जिसके बाद सहायता के लिए चिकित्सा टीम को बुलाया गया। तकनीकी प्रतिनिधि से सलाह के बाद हालांकि इस फैसले को पलट दिया और आशीष को अयोग्य करार दिया गया। फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश के मुक्केबाज आशीष ने विरोध दर्ज कराया और आधिकारिक शिकायत भी दायर की। इसके बाद बीएफआई ने मामले की समीक्षा शुरू की और संबंधित रेफरी को एक दिन के लिए ड्यूटी से हटा दिया। बीएफआई के कार्यकारी निदेशक कर्नल अरुण मलिक ने कहा, हमने तकनीकी प्रतिनिधि से मामले की जांच करने को कहा है। हम उस समय हुई घटना के तथ्यों की जांच कर रहे थे, इसलिए रेफरी को उस दिन कोई ड्यूटी नहीं दी गई। बाद में रेफरी को फिर से रोस्टर में शामिल कर लिया गया। वहीं आशीष ने कहा, जो भी वीडियो देख रहा है, वह मान रहा है कि मैंने जानबूझकर सिर नहीं मारा। मैं पंच मारकर पीछे हट रहा था और उसी दौरान सिर टकरा गया। क्या एक ओलंपियन के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है? इस फैसले का हिमाचल प्रदेश मुक्केबाजी संघ (एचपीबीए) ने भी कड़ा विरोध किया है। ----------------- स्वीटी ने भी उठाए सवाल पूर्व विश्व चैंपियन स्वीटी बूरा ने भी टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन से करीबी मुकाबले में हार के बाद रेफरी पर सवाल उठाए। स्वीटी शुरुआती दौर के बाद 4-1 से आगे थीं, लेकिन उन्हें 2-3 से हार मिली। स्वीटी ने कहा, मैं लगातार जवाबी पंच लगा रही थी। मेरे हिसाब से लवलीना को तीन काउंट देने के बाद मुकाबला पहले राउंड में ही खत्म हो जाना चाहिए था, लेकिन मैच तीन राउंड तक गया। जब कोई पदक विजेता होता है तो जज पर भी दबाव होता है। मुझे लगा था कि फैसला 5-0 से मेरे पक्ष में आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वह सटीक जगह पंच नहीं लगा पा रही थी। अगर खिलाड़ियों को मौका ही नहीं दिया जाएगा तो और पदक विजेता कैसे निकलेंगे? -----------

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