पर्यावरणीय मंजूरी के नियमों में बदलाव पर कांग्रेस ने केंद्र को घेरा

Jan 08, 2026 05:15 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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कांग्रेस ने सरकार के उस नीतिगत बदलाव की आलोचना की है, जिसमें गैर-कोयला खनन परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय मंजूरी के लिए भूमि अधिग्रहण का प्रमाण आवश्यक नहीं होगा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यह निर्णय जिम्मेदार पर्यावरणीय शासन के लिए एक बड़ा झटका है।

पर्यावरणीय मंजूरी के नियमों में बदलाव पर कांग्रेस ने केंद्र को घेरा

नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस ने सरकार की ओर से किए गए उस नीतिगत बदलाव की गुरुवार को कड़ी आलोचना की, जिसके तहत गैर-कोयला खनन परियोजना विकासकर्ताओं को पर्यावरणीय मंजूरी के लिए भूमि अधिग्रहण का प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं होगा। कांग्रेस ने कहा कि यह जिम्मेदार पर्यावरणीय शासन पर केंद्र सरकार का एक और प्रहार है। पर्यावरण मंत्रालय के हालिया ज्ञापन के अनुसार, गैर-कोयला खनन परियोजना विकासकर्ताओं को अब पर्यावरणीय मंजूरी के लिए भूमि अधिग्रहण का प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं होगा। अब तक यह आवश्यक होता था। कांग्रेस महासचिव और पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा, गैर-कोयला खनन परियोजनाओं के लिए नीति यह रही है कि पहले कानून के अनुसार भूमि अधिग्रहण पूरा किया जाए, उसके बाद ही पर्यावरण संबंधी मंजूरी मांगी जा सकती है।

हालांकि, 18 दिसंबर 2025 को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इस नीति में बदलाव किया और अब गैर-कोयला खनन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण से पहले पर्यावरण संबंधी मंजूरी मांगी जा सकती है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह समझ से परे है कि गैर-कोयला खनन परियोजना के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र की पूरी जानकारी के बिना सार्थक पर्यावरणीय प्रभाव आकलन कैसे किया जा सकता है। उन्होंने कहा, यह नीतिगत बदलाव देश में जिम्मेदार और जवाबदेह पर्यावरणीय शासन के लिए केंद्र सरकार का एक और झटका है।

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