महिला आरक्षण पर रुख तय करने के लिए ‘इंडिया’ की बैठक आज
कांग्रेस ने नारी शक्ति अधिनियम में संशोधन के लिए संसद की विशेष बैठक से एक दिन पहले इंडिया गठबंधन के घटक दलों की बैठक बुलाई है। इसमें आम आदमी पार्टी को भी आमंत्रित किया गया है, हालांकि वह गठबंधन से अलग हो चुकी है। कांग्रेस ने सरकार पर संविधान संशोधन बिल साझा न करने का आरोप लगाया है।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। नारी शक्ति अधिनियम में संशोधन करने के लिए संसद के विशेष बैठक से एक दिन पहले बुधवार को कांग्रेस ने इंडियन नेशनल डेवलेपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) के घटक दलों के नेताओं की बैठक बुलाई है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर होने वाली इस बैठक में कई नेता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा लेंगे। क्योंकि, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि इंडिया गठबंधन की बैठक में आम आदमी पार्टी को भी आमंत्रित किया गया है। हालांकि, आम आदमी पार्टी बहुत पहले इंडिया गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर चुकी है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद दोनों पार्टियों ने एक दूसरे पर काफी आरोप-प्रत्यारोप लगाए थे। पर, इस वक्त विपक्षी एकता जरूरी है। इसलिए, ‘आप’ को आमंत्रित किया गया है।इंडिया गठबंधन के भविष्य को लेकर घटकदल भी सवाल उठाते रहे हैं। क्योंकि, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद गठबंधन की बहुत कम बैठक हुई है। इंडिया गठबंधन के नेताओं की आखिरी बैठक मतदाता सूची में गड़बड़ी के मुद्दे पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सरकारी आवास पर अगस्त 2025 को हुई थी। इसके बाद गठबंधन के नेताओं की कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई है।इस बीच, कांग्रेस ने फिर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि सरकार ने अभी तक सांसदों के साथ संविधान संशोधन बिल या बिलों को साझा नहीं किया है। पार्टी ने लोकतंत्र का मजाक करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार की बुलडोजर वाली मानसिकता सामने आ रही है।जयराम रमेश ने कहा कि संसद की विशेष बैठक 16 अप्रैल को शुरू हो रही है, जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रचार अपने चरम पर होगा। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा है कि सरकार ने चुनाव के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने के विपक्ष के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। वहीं, विधेयकों को भी साझा नहीं किया है। उन्होंने कहा, जब किसी विधेयक के पीछे का इरादा शरारतपूर्ण हो और उसकी विषयवस्तु कपटपूर्ण हो, तो संसदीय लोकतंत्र को होने वाला नुकसान बहुत बड़ा होता है।
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