Hindi NewsNcr NewsDelhi NewsConcerns Raised Over Glacier Shrinkage Amid Climate Change by Environment Minister
हिमालय जैसे क्षेत्र में संतुलित विकास परियोजनाएं हों : भूपेंद्र यादव

हिमालय जैसे क्षेत्र में संतुलित विकास परियोजनाएं हों : भूपेंद्र यादव

संक्षेप:

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के घटते क्षेत्रफल पर चिंता जताई। उन्होंने हिमालय जैसे इकोसिस्टम में संतुलित विकास परियोजनाओं की आवश्यकता पर जोर दिया और प्राकृतिक संसाधनों के रणनीतिक महत्व को समझाया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के लिए संतुलित नीतियों की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।

Jan 12, 2026 08:31 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, एजेंसी। जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाली चुनौतियों के चलते ग्लेशियरों के घटते क्षेत्रफल पर सोमवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने चिंता जताई। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि हिमालय जैसे महत्वपूर्ण इकोसिस्टम में विकास परियोजनाएं संतुलित होनी चाहिए। भूपेंद्र यादव ने प्राकृतिक संसाधनों के रणनीतिक महत्व पर भी जोर दिया। कहा कि आज की भू-राजनीति काफी हद तक प्राकृतिक संसाधनों और उनके उपयोग पर निर्भर करती है। दिल्ली में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड एप्लीकेशन ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज टू ट्रांसफॉर्म, अडैप्ट एंड बिल्ड रेजिलिएंस की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के पास प्राकृतिक संसाधनों का एक बड़ा भंडार है और इनके संतुलित, उपयुक्त और समझदारी से उपयोग की जरूरत है।

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कहा कि हमारी ताकत हमारे प्राकृतिक संसाधनों, खासकर जैव संसाधनों में है। जबकि भारत ने मैन्युफैक्चरिंग, डेटा, सॉफ्टवेयर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में प्रगति की है। वहीं, जीवन की चार जरूरी चीजें भोजन, दवा, ऊर्जा और तेल आखिरकार प्रकृति से ही मिलती हैं। उन्होंने कहा कि देश को पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के लिए एक संतुलित नीति बनानी चाहिए। घटते ग्लेशियर और संतुलित विकास के लेकर उन्होंने कहा कि जीबी पंत नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हिमालयन इकोलॉजी और नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल कोस्टल मैनेजमेंट जैसे संस्थान सहयोग और तालमेल के जरिये इस संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।